सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए डुअल-फोन प्रोटोकॉल फॉलो कर रहे थे आतंकी
Delhi Blast Update, (आज समाज), नई दिल्ली: 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए ब्लास्ट से जुड़े व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल के आतंकी डॉक्टरों ने घोस्ट सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था। इसके जरिए वे पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ कोआॅर्डिनेट करते थे। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने रविवार को दावा किया कि आतंकी सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए डुअल-फोन प्रोटोकॉल फॉलो कर रहे थे।
हर आरोपी के पास दो से तीन मोबाइल थे। शक से बचने के लिए इनके नाम पर रजिस्टर्ड एक क्लीन फोन होता था। दूसरा टेरर फोन था जिसके जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर बात करते थे। गौरतलब है कि लाल किले के पास कार विस्फोट मामले में 15 लोगों की जान चली गई थी। इसकी जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी कर रही है।
हमले के बाद लागू हुआ एक्टिव सिम कार्ड का नियम
डिवाइस में फिजिकल सिम के बिना मैसेजिंग ऐप्स चलाने की सुविधा का फायदा उठाकर ही ये लोग डॉक्टरों को यूट्यूब के जरिए आईईडी बनाना सिखाते और हमले का निर्देश दे रहे थे। जांच के खुलासे के बाद ही टेलीकम्युनिकेशंस डिपार्टमेंट ने पिछले साल 28 नवंबर को निर्देश था कि वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिगनल के लिए एक्टिव सिम कार्ड का नियम लागू किया है।
क्या होती है घोस्ट सिम
घोस्ट सिम ऐसी मोबाइल सिम या सिम आईडी को कहा जाता है, जो किसी असली व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर नहीं होती। बल्कि फर्जी/चोरी किए गए दस्तावेजों से एक्टिव कराई जाती है। कई मामलों में यह ई-सिम या क्लोन की गई सिम भी हो सकती है, जिसका इस्तेमाल असली यूजर की जानकारी के बिना किया जाता है।
घोस्ट सिम का इस्तेमाल
इसका इस्तेमाल डिजिटल फ्रॉड (डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड), म्यूल बैंक अकाउंट से लिंक करने के लिए, फर्जी कॉल, धमकी, ठगी और सोशल मीडिया या ऐप्स पर फेक अकाउंट बनाने के लिए किया जाता है।
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