अमेरिका द्वारा नई टैरिफ दरें लागू करने से बदल जाएगी भारत के अमेरिका को निर्यात की तस्वीर

Business News Today (आज समाज), बिजनेस डेस्क : भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आजकल सबसे ज्यादा परेशानी का सबब अमेरिका द्वारा लगाई जा रही 50 प्रतिशत की टैरिफ दरें हैं। ज्ञात रहे कि अमेरिकी राष्टÑपति ने पहले 31 जुलाई और फिर छह अगस्त को भारत पर दो बार 25-25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।

अमेरिका द्वारा अब भारतीय कंपनियों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा रहा है जोकि भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। इसी के चलते भारतीय शेयर बाजार में भी हड़बड़ाहट की स्थिति बनी हुई है और यह दो दिन में ही 1550 से ज्यादा अंक टूट चुका है। हालांकि केंद्र सरकार किसी भी तरीके से अमेरिका के इस टैरिफ से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है लेकिन ज्यादा सफलता अभी मिलती दिखाई नहीं दे रही।

भारत के कुल निर्यात का अमेरिकी बाजार में 20 फीसदी हिस्सा

भारत दुनियाभर में कुल 38 लाख करोड़ के प्रोडक्ट्स निर्यात करता है। इसमें से 20% सामान अमेरिका में बिकते हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ लगने के बाद करीब 4.22 लाख करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट प्रभावित होगा। सरकार को अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए यूरोप, रूस या अन्य देशों में व्यापार बढ़ाना होगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प के टैरिफ लगाने के बाद भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने लगभग 50 देशों के लिए नई निर्यात रणनीति बनाई है। इसके तहत भारत अब चीन, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के बाजारों पर फोकस करेगा।

भारत इन देशों से कर चुका ट्रेड डील

आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के साथ भारत ट्रेड डील कर चुका है। ये 1 अक्टूबर से लागू होगा। ब्रिटेन के साथ डील अगले साल अप्रैल से लागू हो सकती है। ओमान, चिली, पेरू, आॅस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ से बातचीत जारी है। भारत सीफूड के लिए रूस, वङ, यूरोपीय यूनियन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया पर फोकस कर रहा है। वहीं हीरे और आभूषण के लिए वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और अफ्रीका जैसे बाजारों की ओर रुख कर रहा है।

रूस ने दिया भारतीय कंपनियों को न्योता

अमेरिकी राष्टÑपति द्वारा भारत-रूस व्यापार मुद्दे को बड़ा ईश्यू बनाने का विरोध करते हुए रूस ने पिछले दिनों भारतीय कंपनियों को कहा था कि यदि अमेरिका भारतीय सामान के लिए अपने बाजार बंद कर सकता है तो रूसी बाजार भारतीय उत्पादों के लिए खोल दिए जाएंगे। अब देखना यह होगा की भारत इस स्थिति से निपटने के लिए आने वाले दिनों में क्या योजना अपनाता है।

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