पश्चिम-एशिया में स्थिति विस्फोटक, अमेरिका ने इजरायल स्थित अपने दूतावास कर्मियों को देश छोड़ने को कहा
US-Iran Conflict (आज समाज), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच संभावित टकराव के चलते हुए पश्चिम एशिया पर युद्ध का संकट लगातार मंडरा रहा है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी यह स्वीकार कर लिया है कि हो सकता है उन्हें युद्ध की नीति अपनानी पड़े। ज्ञात रहे कि गत दिवस जिनेवा में दोनों पक्षों के बीच ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत एक बार फिर से बेनतीजा रही। दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे जिससे युद्ध का खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है।
अमेरिका ने अपने कर्मियों और नागरिकों को ये आदेश दिए
पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने इस्राइल स्थित अपने दूतावास कर्मियों को तत्काल देश छोड़ने के लिए कहा है। अमेरिकी राजदूत माइक हक्काबी ने कर्मचारियों को भेजे आपातकालीन ईमेल में स्पष्ट किया कि जो भी कर्मचारी स्वेच्छा से जाना चाहते हैं, वे अविलंब प्रस्थान करें। यह कदम ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले और क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के खतरों को देखते हुए उठाया गया है।
राजदूत ने कर्मियों को सचेत किया है कि आगामी दिनों में उड़ानों की उपलब्धता अनिश्चित हो सकती है, इसलिए प्रस्थान के इच्छुक लोग आज ही निर्णय लें। गौरतलब है कि एक दिन पूर्व ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है, जिसके बाद क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की तैनाती बढ़ा दी गई है। उधर, ईरान ने भी तैयारी की है। एजेंसी
कई एयरलाइन ने सेवाएं कीं निलंबित
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हलचल का व्यापक असर दिख रहा है। नीदरलैंड की केएलएम (केएलए) समेत कई एयरलाइंस ने तेल अवीव के लिए अपनी सेवाएं निलंबित कर दी हैं। आॅस्ट्रेलिया ने भी अपने राजनयिकों के परिजनों को इस्राइल छोड़ने का निर्देश दिया है, जबकि भारत और कई यूरोपीय देशों ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा न करने की सलाह जारी की है। उधर, यूएई और सऊदी अरब ने अपने वायु क्षेत्र से किसी भी देश की उड़ानों को गुजरने देने की इजाजत पहले ही प्रतिबंधित कर दी है।
ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका को दी थी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गत दिवस जिनेवा रवाना होने से पहले चेतावनी दी कि अगर अमेरिका हमला करता है तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर होंगे। उन्होंने कहा यह किसी के लिए जीत की स्थिति नहीं होगी। पूरा क्षेत्र एक विनाशकारी युद्ध की चपेट में आ सकता है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस्राइल को भी निशाना बना सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
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