Budget 2026-27 : वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सार्वजनिक वित्त की मजबूती बड़ी चुनौती : जोशी

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Budget 2026-27 : वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सार्वजनिक वित्त की मजबूती बड़ी चुनौती : जोशी
Budget 2026-27 : वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सार्वजनिक वित्त की मजबूती बड़ी चुनौती : जोशी

कहा, इस बार बजट अपेक्षाकृत अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों में तैयार किया जा रहा

Budget 2026-27 (आज समाज), बिजनेस डेस्क : एक फरवरी को देश की वित्त मंत्री जब वर्ष 2026-27 के लिए देश का आम बजट पेश कर रहीं होंगी तो उनके सामने एक मुख्य चुनौती होगी। यह चुनौती वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजारों की अस्थिरता के बीच सार्वजनिक वित्त की मजबूती बनाए रखना होगा। इसका कारण यह है कि चाहे पिछले कुछ माह में देश की आर्थिक वृद्धि अनुमान से बेहतर रही है और महंगाई भी अपेक्षा से कम दर्ज हुई है।

इससे नीति निर्माण में सरकार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हालात अभी भी जोखिम पैदा कर रहे हैं। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के मुताबिक 2026-27 वित्त वर्ष में नाममात्र जीडीपी के बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कर संग्रह में सुधार और कॉरपोरेट सेक्टर की स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य बेहद अनिश्चित और अस्थिर है, इसलिए सरकार को वित्तीय अनुशासन बनाए रखना होगा।

जीडीपी विकास दर को लेकर केंद्र के आंकड़े

सरकार ने 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर लगभग 7.3-7.4 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.3 प्रतिशत था। आईएमएफ ने भी इसी तरह का अनुमान लगाया है। जोशी के अनुसार अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि करीब 6.7 प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि 27 फरवरी को होने वाली जीडीपी री-बेसिंग से अर्थव्यवस्था के आकार और गति को लेकर नई तस्वीर सामने आ सकती है।

अमेरिका और यूरोप से व्यापार समझौते पर जोर

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संदर्भ में जोशी ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते को अहम बताया। उनका कहना है कि इससे भारतीय निर्यातकों को स्थिरता मिलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत पर लागू उच्च टैरिफ का असर और अधिक बढ़ सकता है, अगर अमेरिका के साथ समझौता नहीं हुआ। आगामी बजट में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप सुधारों को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है। जोशी के अनुसार सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड केमिकल सेल बैटरी जैसे नए क्षेत्रों को प्रोत्साहन दे सकती है।

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