Dimple Yadav Big Announcement: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी लड़ाई अब धीरे-धीरे तेज होती जा रही है। चुनाव में अभी काफी वक्त है, लेकिन राजनीतिक दलों ने वोटर्स को साधने की तैयारी शुरू कर दी है। यूपी में अच्छी खासी तादाद महिला वोटर्स की है और इसे अभी बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है। यही वजह है कि विपक्षी दलों की सीधी नजर महिलाओं के वोट बैंक पर है। एक तरफ योगी सरकार महिलाओं को लुभाने के लिए नए-नए ऐलान कर रही है, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव की सपा भी पीछे नहीं है। सपा ने भी चुनाव को देखते हुए महिलाओं से कई बड़े वादे कर दिए हैं।
समाजवादी पार्टी ने महिलाओं को लेकर अपना बड़ा चुनावी एजेंडा सामने रखा है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ समेत महिलाओं और छात्राओं के लिए कई घोषणाएं की हैं। इनमें गरीब महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये की आर्थिक मदद, सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण, छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और हर महीने दो दिन की इमरजेंसी लीव जैसे वादे हैं। दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी महिलाओं को लेकर हाल में कई फैसले किए हैं। 25 अगस्त को यूपी कैबिनेट ने 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा की योजना को मंजूरी दी। सरकार मेधावी छात्राओं को फ्री स्कूटी भी बांट रही है। ऐसे में सवालस है कि 2027 के यूपी चुनाव में महिला वोट किसके पक्ष में जाएगा? क्या सपा 10 वादों के सहारे BJP के फीमेल वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी?
सपा के महिलाओं से जुड़े 10 वादे जान लीजिए
हर साल महिलाओं को 40 हजार रुपये की आर्थिक मदद : सपा के सबसे बड़े चुनावी वादों में ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ शामिल है। डिंपल यादव के मुताबिक इस योजना की शुरुआत महिलाओं को 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से की जाएगी और आने वाले वर्षों में इस राशि को बढ़ाया जाएगा।
महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण : सपा ने महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 33 फीसदी आरक्षण देने का भी वादा किया है। इसका उद्देश्य सरकारी रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना बताया गया है।
12वीं पास छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप : सपा ने 12वीं पास करने वाली हर छात्रा को मुफ्त लैपटॉप देने का वादा किया है। पार्टी का कहना है कि तकनीक और शिक्षा के जरिए छात्राओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा।
सरकारी स्कूलों में पूरी फीस माफ, प्राइवेट स्कूलों में आधी फीस : सपा के ऐलान में छात्राओं की शिक्षा से जुड़ा एक और बड़ा वादा शामिल है। पार्टी ने कहा है कि सत्ता में आने पर सरकारी स्कूलों में छात्राओं की पूरी फीस माफ की जाएगी, जबकि प्राइवेट संस्थानों में 50% फीस माफ करने का प्रावधान किया जाएगा।
कामकाजी महिलाओं को महीने में दो दिन की छुट्टी : सपा ने कामकाजी महिलाओं के लिए हर महीने दो दिन की इमरजेंसी लीव की व्यवस्था करने का वादा किया है। यह सुविधा सरकारी और निजी कार्यालयों से जुड़ी महिलाओं के लिए बताई गई है।
पूरे यूपी में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा : सपा ने प्रदेश की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का भी वादा किया है। पार्टी का कहना है कि इससे महिलाओं को आवागमन में आर्थिक राहत मिलेगी और उनकी स्वतंत्र आवाजाही आसान होगी।
विधवा और बेसहारा महिलाओं को पक्का घर : सपा ने वादा किया है कि सरकार बनने पर हर विधवा और बेसहारा महिला को पक्का सरकारी मकान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उन महिलाओं को आवासीय सुरक्षा देना है जिनके पास अपना घर नहीं है और जो आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं।
निराश्रित महिलाओं के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी : सपा ने एक सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा वादा भी किया है। पार्टी के मुताबिक किसी निराश्रित महिला की मृत्यु होने पर उसके सम्मानजनक अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी।
हर तहसील में PG कॉलेज और हर जिले में यूनिवर्सिटी : महिला शिक्षा के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए सपा ने हर तहसील में एक पीजी कॉलेज और हर जिले में एक विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया है। पार्टी इसे उच्च शिक्षा को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में कदम के रूप में पेश कर रही है।
महिला अपराध के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट : महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सपा ने महिला अपराध से जुड़े मुकदमों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का वादा किया है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों की सुनवाई को तेजी से पूरा करना बताया गया है।
सरकार के फैसलों से क्यों जुड़ा है सपा का ऐलान?
सपा के इन वादों को उस समय देखना महत्वपूर्ण है, जब योगी सरकार भी महिलाओं और छात्राओं को लेकर लगातार घोषणाएं कर रही है। 25 अगस्त को कैबिनेट ने 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा को मंजूरी दी। इसके अलावा सरकार ने 25 लाख 12वीं पास छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप देने और 50 हजार लड़कियों के लिए मुफ्त स्कूटी से जुड़ी योजनाओं की भी घोषणा की है। इससे साफ है कि 2027 के चुनाव से पहले महिला मतदाताओं के लिए योजनाओं और वादों की प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। राजनीतिक दल अब केवल पारंपरिक जातीय समीकरणों पर निर्भर रहने के बजाय महिलाओं को एक महत्वपूर्ण चुनावी समूह के रूप में देख रहे हैं।
UP में महिला वोट इतना महत्वपूर्ण क्यों?
2022 के विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 6.98 करोड़ महिला मतदाता थीं। कुल मतदाताओं की संख्या करीब 15 करोड़ थी। यानी राज्य के चुनावी गणित में महिलाओं की हिस्सेदारी बेहद बड़ी है। हाल के चुनावों में महिला मतदान की सक्रियता ने भी राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है। यही वजह है कि महिलाओं के लिए सीधे आर्थिक लाभ, मुफ्त परिवहन, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े वादे चुनावी रणनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
2027 में किसके साथ जाएगी आधी आबादी?
यूपी की सियासत में महिला वोट अब सिर्फ किसी एक योजना या एक घोषणा से तय होने वाला मुद्दा नहीं रह गया है। एक तरफ योगी सरकार मुफ्त बस यात्रा, छात्राओं के लिए लैपटॉप और अन्य महिला-केंद्रित योजनाओं के जरिए अपना रिकॉर्ड और नई घोषणाएं सामने रख रही है। दूसरी ओर सपा ने आर्थिक मदद, आरक्षण, शिक्षा, रोजगार से जुड़ी सुविधाओं, मुफ्त यात्रा और महिला सुरक्षा को एक बड़े पैकेज के रूप में पेश किया है। अब असली परीक्षा यह होगी कि चुनाव तक इन घोषणाओं का स्वरूप कितना बदलता है, कौन-सी योजनाएं जमीन पर लागू होती हैं, सपा अपने वादों का वित्तीय और प्रशासनिक रोडमैप कैसे पेश करती है और महिला मतदाता इन वादों को किस तरह देखती हैं।


