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Devotees danced between flowers and gulal rains: पुष्प और गुलाल वर्षा के मध्य थिरके हुरियारे-हुरियारिनें एवं भक्तजन

मथुरा। आज फाल्गुन शुक्ल रंगभरी एकादशी 25 मार्च 2021 बृहस्पतिवार को जन्मभूमि का परंपरागत रंगारंग लठामार होली के कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास पूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। रंगभरी एकादशी पर ब्रज के प्रसिद्ध मंदिरों में होली का भव्य आयोजन हुआ। ठाकुरजी ने अपने प्रिय भक्तों के साथ होली खेली। रंगभरी एकादशी के अवसर भक्तों ने ठा.बांके बिहारी महाराज के दर्शनों का लाभ लिया और यमुना स्नान कर आचमन लेकर मनौती भी मांगी।  प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर पर ठाकुरजी ने भक्तों अबीर गुलाल उड़ाकर होली की मस्ती में झूमने को मजबूर कर दिया। रंगभरी एकादशी के अवसर पर वृन्दावन परिक्रमा मार्ग में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।  परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले मंदिरों में इस मौके पर भारी भीड़ देखी गई।
इस संबंध में जानकारी देते हुए संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पवित्र प्रांगण में दिव्य रंगारंग लठामार होली के दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो झूम उठे। ब्रज के विभिन्न भागों से होली के भिन्न-भिन्न रूप और रंगों को सहेजे-समेटे श्रीकृष्ण-जन्मस्थान की लठामार होली अनूठी और भावमय है। गणपति एवं ब्रज वन्दना के साथ शुभारम्भ ब्रजविभूति पूज्य काष्र्णि गुरूशरणानन्द जी महाराज ने रसभरी सरकार एवं प्रियाजू को  पुष्पार्चन एवं आरती से किया।  शुभारम्भ से ही खचाखच भरे होली स्थल (केशव वाटिका)  में श्रद्धालु हर्षोल्लास से झूम उठे। ब्रज के सुप्रसिद्ध रसिक कालाकारों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियॉं अत्यन्त सजीव एवं प्रिया-प्रियतम की प्रिय होली लीला की साक्षात अनुभूति करा रहे थे।
यह कहना अतिषयोक्ति पूर्ण नहीं होगा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के पवित्र प्रांगण में जो दृश्य थे उसको देखकर ऐसी साक्षात अनुभूति हो रही थी जैसे प्रिया-प्रियतम के साथ फाग स्वयं नृत्य कर रहा हो।  ब्रज के विभिन्न भागों से पधारे सुप्रसिद्ध लोक गायक/गायिकाओं के गायन पर मंच पर तो स्वयं होली लीला से साक्षात्कार हो ही रहा था। श्रद्धालुओं एवं विशिष्टिजन भी उस अलौकिक वातावरण में सहज भाव से झूम रहे थे।
होली के गायन, वादन, नृत्य, मयूर नृत्य के उपरान्त श्रीप्रिया-प्रियतम के स्वरूप एवं उनके सखा-सखियों ने उस दिव्य पुष्प-होली के दर्शन कराये। मयूर वेष में ठाकुर-ठकुराइन के स्वरूप  आदि  भिन्न-भिन्न रूपों के सजीव दर्शन कर श्रद्धालु अभिभूत थे। सतरंगी पुष्प वर्षा के मध्य पुष्प-होली के दर्शन अत्यन्त मनोहारी और सजीव थी। इस नयनाभिराम  दर्शन को श्रद्धालु तो निहारकर आनन्दित हो ही रहे थे, प्रेस एवं मीडिया के बन्धु भी इस अनूठे दृश्य को अपनी लेखिनी और कैमरों में संजोने के लिए लालायित दिखे, तदोपरान्त विशाल बंब, ढप, ढोल, नगाड़े होली गायन के मध्य जहॉं मंच पर चरकुला नृत्य के सजीव दर्शन हो रहे थे वहीं केशव वाटिका के प्रांगण में रावल ग्राम से पधारे हुरियारे-हुरियारिनों के साथ ब्रज के विभिन्न अंचलों से पधारे गोपी-गोपिकाऐं लठामार होली के अलौकिक भाव को प्रकट कर रहे थे। इस अवसर पर बड़ी मात्रा में पुष्प और गुलाल की वर्षा से संपूर्ण केशव वाटिका इन्द्रधनुषीय स्वरूप  में प्रकट  हो रहा था।  प्रांगण में उपस्थित श्रद्धालु इस विलक्षण होली के दर्शन कर अभिभूत हो श्रीराधे-श्रीराधे के जयघोष से संपूर्ण परिसर को गुंजायमान कर रहे थे।
कार्यक्रम शुभारम्भ से पूर्व संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य व हिन्दूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने पूज्य संत काष्र्णि गुरूशरणानन्दजी महाराज का स्वागत किया।  इस कार्यक्रम को भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, सदस्य व हिन्दूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, सं.मुख्य अधिषाशी राजीव श्रीवास्तव, विजय बहादुर सिंह, अनुराग पाठक, ब्रजेन्द्र कौषिक एवं जय श्रीकृष्ण लठामार होली समिति के पदाधिकारी किशोर भरतिया, नन्दकिशोर अग्रवाल, अनिलभाई, आदि अन्य सदस्य निरन्तर व्यवस्थाओं में जुटे रहे तथा पुलिस-प्रशासन का विशेष सहयोग उल्लेखनीय रहा।

कमलकान्त उपमन्यु

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