HomeपंजाबUncategorizedसब्र किए बिना, निष्कर्ष निकालना गलत

सब्र किए बिना, निष्कर्ष निकालना गलत

हमें किसी की निंदा करने या राय कायम करने से पहले दो बार सोचने की जरूरत है

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज
अपनी जिंदगी जीते हुए अक्सर हमारी यह आदत बन जाती है कि हम दूसरों के बारे में गलत धारणाएं बना लेते हैं। हम किसी की परिस्थिति या जीवन के हालात जाने बिना उनकी आलोचना करते हैं और उनके बारे में तुरंत राय कायम कर लेते हैं। ऐसे में हम यह नहीं सोचते कि हम भी गलत हो सकते हैं।
यह जाने बिना कि लोग ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं हम तुरंत निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं। कोई व्यक्ति हमारी मदद करने की या चीजों को बेहतर करने की कोशिश करता है, फिर भी हम सब्र से यह जानने के बजाय कि वो यह सब क्यों कर रहा है? हम उन्हें फटकार देते हैं। अपने काम के दौरान हमें किसी की निंदा करने या राय कायम करने से पहले दो बार सोचने की जरूरत है। जब तक हमें पूरी बात का पता नहीं हो कि कोई किस मकसद से या किस वजह से कुछ कर रहा है तो बेहतर यही होगा कि कुछ मिनट रूक कर हम उनसे इसके बारे में पूछें। कई बार हम यह पाते हैं कि कोई व्यक्ति मदद करने की कोषिष कर रहा है लेकिन हम अपने जीवन में इतने व्यस्त होते हैं कि इसके बारे में कुछ जानने के लिए हम समय ही नहीं निकालते। जब कोई किसी की आलोचना करता है तब दूसरे भी इसमें साथ देने के लिए चले आते हैं। उन्हें किसी भी स्थिति की कोई जानकारी नहीं होती और जल्द ही कई लोग गलत बातें भी फैला देते हैं। समस्या को तुरंत सुलझाना ही बेहतर होता है।
इससे पहले की स्थिति और ज्यादा खराब हो, हमें स्थिति को समझकर उसे ठीक करना चाहिए। हमें दूसरों को आंकने से बचना चाहिए। अगर हम दूसरों की आलोचना करने में फंस जाते हैं तो हमारा मन भ्रमिक विचारों से भर जाता है, जो हमें आंतरिक शांति से दूर ले जाता है। हम जो भी करते हैं वह लौटकर हमारे पास वापिस आता है। हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों के फल चाहें अच्छे हों या बुरे, वो हमें भुगतने ही पड़ते हैं। जब हम किसी की निंदा करते हैं हमें उसका फल अवश्य भुगतना पड़ता है क्यांकि हमने अपने शब्दों से उन्हें ठेस पहुंचाई है। अपने मन की शांति के लिए और शांत मन से ध्यान-अभ्यास करने के लिए यह आदत बनाना फायदेमंद होगा कि हम किसी के बारे में गलत धारणा न बनाएं और तुरंत निर्णय न लें। इसकी जगह हम प्रेममय और स्नेही बनें और सच्चाई को जानने की कोशिश करें। हमारा यह व्यवहार हमारी आंतरिक शांति में हमें योगदान देगा और यह शांति हमारे वातावरण और पूरी दुनिया में भी फैल जाएगी।
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