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Who is responsible for the situation of the chaos! अव्यवस्था के हालात के लिए जिम्मेदार कौन!

कोरोना की दूसरी बेहद घातक लहर में देश में रोजाना चार लाख से अधिक लोग संक्रमित मिल रहे हैं। बहुत तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण की वजह से धरातल पर स्थिति बहुत अधिक चुनौती पूर्ण बनी हुई है। हालांकि इस स्थिति का सामना हमारे प्यारे देशभक्त देशवासी अपनी हिम्मत व हौसले के साथ बेहद विकट परिस्थितियों में भी शासन-प्रशासन का दिल से पूर्ण सहयोग करते हुए डटकर कर रहे हैं।
लेकिन अब अधिकांश देशवासियों के जहन में एक विचार बार-बार आ रहा है कि आखिरकार हमारे देश में असमय इन जलती चिताओं के लिए जिम्मेदार व्यक्ति कौन-कौन हैं, लोगों को असमय काल का ग्रास बनाने का दोषी कौन है, इस बेहद महत्वपूर्ण सवाल का जवाब ढूंढना बेहद कठिन है, क्योंकि हमारे देश में गलती किसी एक पक्ष ने नहीं की है, सभी पक्षों ने लगातार जमकर गलतियां की हैं। बहुत सारे लोगों ने तो कोरोना वायरस को एक मजाक ही मान लिया था और वह कोरोना गाइडलाइंस का पालन करने में अपनी तौहीन समझते थे। इन लोगों की हरकतों का खामियाजा आज अन्य देशवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
देश में आज के वक्त में धरातल पर बने भयावह हालात देखकर लगता है कि हम लोगों ने और हमारे देश के कर्ताधतार्ओं व सिस्टम में बैठे ताकतवर लोगों ने वर्ष 2020 की दिलोदिमाग को झकझोर देने वाली कोरोना काल की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया था। स्थिति देखकर लगता है कोरोना संक्रमण काल के लंबे समय में सिस्टम में बैठे कुछ लोग ने स्वयं के ज्ञान की आत्ममुग्धता में आकर दुनिया भर के कोरोना विशेषज्ञों की चेतावनियों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था, उल्टे सिस्टम में बैठे कुछ लोगों ने दुनिया को उपदेश देना शुरू कर दिया था कि उन्होंने भारत में कोरोना को नियंत्रित कैसे किया। इन लोगों की गलत नीतियों ने देश को एकबार फिर से कोरोना का ग्रास बनने के लिए छोड़ दिया। वैसे इस हाल के लिए देश की आम जनता भी बहुत अधिक दोषी है क्योंकि जिस तरह से हम लोगों ने बेफिक्र होकर शादी, पार्टी, मौजमस्ती, चुनावी दावतों में भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था, वह कोरोना काल में बिल्कुल भी ठीक नहीं था। देश में एक बहुत बड़े तबके ने तो केंद्र सरकार के द्वारा बनायी गयी कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना पूर्ण रूप से बंद कर दिया था, जिस भयंकर लापरवाही का आज परिणाम यह हुआ कि अब देश में जगह-जगह कोरोना के तेजी से फैलते संक्रमण का विस्फोटक रूप देखने को मिल रहा है।
जिसके चलते हमारे देश में चिकित्सा व्यवस्था काफी हद तक ध्वस्त हो गयी है। हमारे देश के नीतिनिमार्ताओं व सिस्टम को जिस वक्त कोरोना की दूसरी ताकतवर लहर को अच्छे ढंग से नियंत्रण करने के लिए धरातल पर कोई ठोस पहल करनी चाहिए थी, उस वक्त वो विधानसभा व पंचायत चुनावों में बेहद व्यस्त थे। हालांकि अगर इन चुनावों को टाल दिया जाता तो शायद आज कोरोना के इतने प्रचंड प्रकोप का सामना देशवासियों को नहीं करना पड़ता।
अफसोस की बात है कि देश के चंद ताकतवर नेता लोगों के पास जनता की जान बचाने की जगह देश में विभिन्न स्तर के चुनाव लड़ने के लिए समय था। लोगों की अनमोल जान बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जगह देश के अधिकांश पक्ष-विपक्ष के राजनेताओं ने कोरोना आपदाकाल में भी राजनीति करना बेहद जरूरी समझा, जिसके चलते धरातल पर हालात तेजी से खराब हो गये और दूसरी लहर में गांवों में भी कोरोना संक्रमण पहुंच गया है।
आज के समय में पक्ष-विपक्ष से जुड़े लोगों को निष्पक्ष रूप से यह विचार करना है कि क्या जनता की सर्वोच्च अदालत में कोरोना गाइडलाइंस को ठेंगा दिखाने वाले लोग, कालाबाजारी करने वाले लोग, चंद राजनेताओं व सिस्टम में बैठे कुछ लोगों के कृत्य क्षमा योग्य अपराध है? जनता के द्वारा पिछले कुछ माह से चंद राजनेताओं की देखादेखी बरती गयी बेहद भयंकर लापरवाही की वजह से देश में अब हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं, कोरोना वायरस के भयंकर प्रकोप ने मृतकों के अंतिम संस्कार करने के लिए कब्रिस्तान व श्मशानघाट पर मृतकों की लाईन लगवा दी है, जो स्थिति बेहद झकझोर देने वाली है। कुछ आकड़ेबाजी के बाजीगरों ने इस बात पर जोर दिया कि इस हालात के लिए कोरोना का तेजी से फैलने वाला नया वेरियंट ‘इ.1.617’ जिम्मेदार है, जिसको अक्टूबर 2020 में डिटेक्ट किया गया था, लेकिन कटु सत्य यह भी है कि केवल नये वेरियंट ‘इ.1.617’ को भारत में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
हम सभी लोगों को अपने गिरेबान में झांक कर देखना होगा कि हमने किस तरह से देश में कोरोना संक्रमण को बढ़ने के लिए उसके अनुकूल व्यवहार किया था। जिस तरह से हम सभी देशवासी कोरोना वायरस से निश्चिंत होकर लापरवाही करने लग गये थे, आज उसका भयावह परिणाम हम सभी के सामने है। दुख की बात यह है कि बिहार चुनावों के बाद नेताओं की देखादेखी देश में कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना बहुत कम हो गया था और सोशल डिस्टेंसिंग तो लगभग बंद ही हो गई थी। इस तरह की लापरवाही पूर्ण स्थिति भारत जैसे 136 करोड़ की भारीभरकम जनसंख्या वाले विशाल देश में एक बेहद आत्मघाती कदम साबित हुआ। क्योंकि जिस तरह से देश में घटते कोरोना के मामलों की वजह से पिछले कुछ माह पूर्व से लोगों को लगने लगा था कि अब देश में भविष्य में छोटे स्तर पर ही कोरोना वायरस का लोगों में ट्रांसमिशन हो सकता है, हालांकि यही पिछले कई महीनों से देश में होता भी आ रहा था।
लापरवाही भरी यह सोच कोरोना की दूसरी घातक लहर आने पर लोगों के जीवन पर बहुत भारी पड़ गयी है, लाखों लोग कोरोना वायरस के चंगुल में चंद दिनों में ही आ गये हैं और ना जाने कितने घरों के लोगों के जीवन को यह कोरोना वायरस संक्रमण लील गया है। आज देश की स्थिति देखकर यह बिल्कुल स्पष्ट है कि हमारे देश के नीतिनिमार्ताओं व सिस्टम ने कोरोना की दूसरी लहर से लड़ने के लिए सिवाय बतोलेबाजी के धरातल पर कोई ठोस विशेष तैयारी समय रहते नहीं की थी। देश के कर्ताधतार्ओं व सिस्टम ने दूसरी लहर में तेजी से बढ़ते वायरस के संक्रमण के शुरूआती संकेतों पर बिल्कुल भी ना जाने क्यों ध्यान नहीं दिया था या उन्होंने चुनावों के चक्कर में व्यस्त होने की वजह से शायद जानबूझकर दूसरी लहर के जबरदस्त प्रकोप को अनदेखा कर दिया था।

दीपक कुमार त्यागी
(लेखक स्तंभकार व रचनाकार हैं। यह इनके निजी विचार हैं।)

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