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Somvar Vrat Ki Katha In Hindi जानिए सोमवार व्रत की पूजा विधि ,कथा और महत्व के बारे में,कितना शुभ है होता है आज का दिन!  

 

सोमवार के व्रत की महिमा Somvar Vrat Ki Mahima

आज समाज डिजिटल, अंबाला: 

Somvar Vrat Ki Katha In Hindi :इस दिन व्रत करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर एक मनोकामना पूरी करते हैं। सोमवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, सोमवार के दिन व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं महादेव भक्तों के प्रति काफी दयालु हैं। भगवान शिव के आशीर्वाद से भक्तों को किसी भी प्रकार का भय नहीं होता है तथा वह हर मुश्किल से मुक्त होते हैं। शिव जी की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहती है। माना जाता है कि कुंवारी लड़कियों के लिए भी सोमवार का व्रत रखना लाभदायक होता है। अगर आप भी सोमवार का व्रत रखना चाहते हैं तो यहां जानिये सोमवार व्रत,पूजा विधि, कथा और महत्व ।

सोमवार व्रत पूजा विधि (Somvar Vrat Ki Puja)

Somvar Vrat Ki Katha In Hindi

सोमवार के दिन शिव भक्तों को सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव और पार्वती को स्मरण करके व्रत रखना चाहिए। सोमवार को शिवजी को जल और बेलपत्र चढ़ाएं और भगवान शिव के साथ संपूर्ण शिव परिवार की पूजा करें। पूजा करने के बाद कथा सुनें और आरती करें।

सोमवार व्रत कथा (Somvar Vrat Ki Katha)

Somvar Vrat Ki Katha In Hindi:एक शहर में एक साहूकार रहता था जिसे किसी चीज की कमी नहीं थी। हर तरह से परिपूर्ण होने के बाद भी वह हमेशा परेशान रहा करता था। ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए वह सोमवार का व्रत रखता था और शिव मंदिर जाकर शिव-पार्वती की पूजा करता था। साहूकार की भक्ति देखकर मां पार्वती खुश हो गईं और उन्होंने भगवान शिव से साहूकार की इच्छा पूरी करने के लिए कहा। तब भगवान शिव ने पार्वती माता को यह समझाया कि हर किसी को उसके कर्मों का फल मिलता है जो उसे भोगना ही पड़ता है।

भगवान शिव के समझाने पर पार्वती मां नहीं मानी और उन्होंने वापस भगवान शिव से साहूकार की इच्छा पूरी करने के लिए कहा। शिव जी ने दिया पुत्र का वरदान। पार्वती मां की वजह से भगवान शिव ने साहूकार को पुत्र का वरदान दिया लेकिन उस पुत्र की उम्र सिर्फ 12 वर्ष ही रखी। पुत्र पाकर भी साहूकार खुश नहीं था।लेकिन उसने शिव जी की भक्ति करना नहीं छोड़ा। कुछ समय के बाद साहूकार का बेटा हुआ। जब साहूकार का बेटा 11 वर्ष का हो गया था। तब उसे पढ़ाई के लिए काशी भेज दिया गया था।

साहूकार ने अपने बेटे के साथ उसके मामा को भी ढेर सारा धन देकर भेज दिया था। साहूकार ने कहा था कि रास्ते में ब्राह्मणों को भोजन करवाना और यज्ञ करवाना। साहूकार की बात मानकर मामा और भांजे काशी की ओर चल पड़े। रास्ते में उन्हें जो भी ब्राह्मण मिलता वह उसे भोजन करवाते और दक्षिणा देते। रास्ते में मामा और भांजे को एक राज्य मिला जहां के राजा की बेटी की शादी हो रही थी। राजा की बेटी की शादी जिस राजकुमार के साथ हो रही थी वह काना था और यह बात राजा को नहीं पता थी। मामा और भांजे को राजकुमार का पिता मिला जो उन्हें अपने साथ ले गया।

साहूकार के बेटे को देखकर उसने सोचा कि अपने बेटे की जगह साहूकार के बेटे को दूल्हा बना दिया जाए। उसने साहूकार के मामा से बात की तो वह मामा भांजा राजी हो गए। विधि-विधान के साथ लड़के का विवाह हो गया। साहूकार का बेटा बहुत इमानदार था और उसने राजकुमारी की चुन्नी के पल्ले पर लिख दिया कि उसकी शादी साहूकार के पुत्र के साथ हुई है। लेकिन उसको जिस राजकुमार के साथ भेजा जाएगा वह एक आँख से काना है।

राजकुमारी ने यह बात जाकर अपने माता-पिता को बता दी। राजा ने अपनी बेटी को विदा नहीं किया जिस वजह से बारात को वापस जाना पड़ा। यह सब होने के बाद साहूकार का बेटा और उसका मामा काशी की ओर निकल गए। काशी पहुंच कर उन्होंने यज्ञ करवाया। जिस दिन साहूकार के बेटे की उम्र 12 साल हुई उस दिन यज्ञ रखा गया था। यज्ञ के दौरान साहूकार के बेटे ने अपने मामा से कहा कि उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है इसीलिए वह अंदर जाकर सोने लगा। थोड़ी देर बाद उसके प्राण निकल गए।

Somvar Vrat Ki Katha In Hindi

जब मामा को पता चला कि उसके भांजे की मृत्यु हो गई है तो वह रोने लगा। उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती वहीं मौजूद थे। रोने की आवाज सुनकर माता पार्वती ने कहा कि उनसे यह आवाज सहन नहीं हो रही है। उन्होंने शिव जी से प्रार्थना की कि वह व्यक्ति के दुख दूर कर दें। जब भगवान शिव उस व्यक्ति के पास पहुंचे तब उन्होंने मृत बच्चे को देखकर पहचान लिया कि यह साहूकार का बेटा है। उन्होंने कहा कि अब साहूकार का बेटा 12 वर्ष का हो गया है इसी के लिए इसके प्राण निकल गए हैं।

Bhole Nath Vrat Ki Puja:महादेव की बात सुनकर पार्वती माता ने उनसे कहा कि वह इस बालक को पुनर्जीवित कर दें नहीं तो इसके माता-पिता इस दर्द को सहन नहीं कर पाएंगे। पार्वती माता की बात मानकर भगवान जी ने साहूकार के बेटे को पुनर्जीवित कर दिया। जब मामा और भांजा वापस अपने शहर की ओर जा रहे थे तब उन्हें वह राजा मिला जिसकी बेटी की शादी साहूकार के बेटे से हो गई थी। वह राजा साहूकार के बेटे से बहुत प्रसन्न था इसीलिए उसने साहूकार के बेटे के साथ अपनी बेटी को विदा कर दिया।

सोमवार व्रत महत्व (Bhole Nath Vrat Ki Puja In Hindi)

हिंदू वेद और पुराणों के अनुसार, सोमवार के दिन जो भक्त शिव पार्वजी की पूजा करता है वह हर प्रकार की समस्याओं से दूर रहता है। शिवजी की उपासना करने से घर में माता लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है। आर्थिक समस्याओं से भी शिव के भक्तों को छुटकारा मिलता है। और उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।

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