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Utterkatha: After the great churning, it’s the turn of Mahasamar : उत्तरकथा : महामंथन के बाद महासमर की बारी !

यूपी में लंबी चली रस्साकशी का संदेश सामने है कि सब भुलाकर सामूहिक नेतृत्व में और पहले से ज्यादा संगठित होकर भारतीय जनता पार्टी सियासी समर में उतरेगी। विधानसभा चुनावों की अहमियत के आगे व्यक्तिगत अहं और मांगों को नजरअदांज किया गया। सामने रण हो तो सेनापति नहीं बदला जाती और व्यूहरचना भी उसी के मुताबिक की जाती है। समर की इस खास बात को सिर माथे पर लिया है भाजपा ने। बहरहाल यूपी में चुनाव की बागडोर 2014 के लोकसभा और 2017 के चुनाव में कामयाबी की कमान संभाल चुके केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथ होगी ।
पूरे देश का ध्यान कोरोना संकट को भूल बीते एक महीने से उत्तर प्रदेश के घटनाक्रम पर लगा रहा। भाजपा के लिए सबसे अहम माने जाने वाले इस राज्य में जनता का मामूली असंतोष भी पेशानी पर बल लाने के लिए काफी है पर यहां तो पंचायत चुनाव फिर कोरोना की दूसरी लहर संभालने में आयी दिक्कत से उपजी नाराजगी साफ दिख रही थी। सरकार से लेकर संगठन में बीते कुछ महीनों से चल रही खींचतान भी सतह पर नजर आ रही थी तो चर्चा में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और यूपी के मुखिया के असहज हो चले रिश्तों की बात भी उठने लगी थी। ये सारी बाते उस समय होने लगीं जब उत्तर प्रदेश की विधानसभा चुनावों के लिए महज आठ महीने का समय बचा और दिल्ली की गद्दी के बाद भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण संग्राम लखनऊ की सत्ता का ही है।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में 39 प्रतिशत से से अधि‍क वोट पाकर 312 सीटें जीतने वाली भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस प्रदर्शन को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में दोहराने की है। अगले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा प्रदेश के 75 जिलों होने वाले जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव के जरिए अपनी शक्ति दिखाने की तैयारी में है। यह चुनाव 15 जुलाई से पहले प्रस्तावित हैं। नव निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य अपने जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। अगले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर किसी प्रकार के मतभेद और गुटबाजी से बचने के लिए भाजपा जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों का नाम आपसी सहमति से तय करेगी।
दरअसल कोरोना की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश में कई चुनौतियां एक साथ भाजपा के सामने आ गई। पंचायत चुनाव में अनुकूल नतीजे नहीं आने के बाद गांव कोरोना संक्रमण से भी पीडि़त हुए। प्रदेश में कोरोना से हुए नुकसान के “डैमेज कंट्रोल” की चुनौती ने भाजपा को यूपी में संगठन या सरकार में कोई बड़ा परिवर्तन करने से रोक दिया है। यूपी में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की घोषणा होने में सात महीने का समय रह गया है। ऐसे में भाजपा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश संगठन की कमियों को दूरकर कार्यकर्ताओं को एकजुट करना है।
महासमर के ठीक पहले सरकार में और संगठन में खींचतान, मनमुटाव की खबरों, जनता में असंतोष के बीच भाजपा ने जबरदस्त तरीके से डैमेज कंट्रोल की कवायद की। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी. एल. संतोष 31 मई की सुबह यूपी भाजपा दफ्तर पहुंचे और दिन भर पार्टी के पदाधि‍कारियों के साथ बैठक करने के बाद अगले दिन एक-एक करके प्रदेश सरकार के मंत्रियों से बंद कमरे में मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और संगठन व सरकार के कामकाज के बारे फीडबैक लिया। संतोष ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार में दोनों उपमुख्यमंत्रिरयों केशव मौर्य और दिनेश शर्मा के साथ कुल 14 मंत्रियों से बात कर उनसे सरकार के कार्यप्रणाली के बारे में राय ली। संतोष ने जिन मंत्रियों से अकेले में बातचीत की उनमें से ज्यादातर वे थे जिन्होंने पिछले चार वर्षों के दौरान समय-समय पर प्रदेश सरकार के कामकाज पर असंतोष जाहिर किया था। तीन दिन पार्टी पदाधि‍कारियों और भाजपा सरकार के मंत्रियों से फीडबैक लेने के बाद बी. एल. संतोष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के बाद बी. एल. संतोष ने 1 जून की रात ट्वीट करके कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान योगी सरकार के कामकाज की प्रशंसा की। लखनऊ के तीन दिवसीय दौरे की समाप्ति पर 2 जून को बी. एल. संतोष ने दोबारा ट्वीट करके कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए योगी सरकार के टीकाकरण अभियान की सराहना की और बच्चों की बेहतर देखभाल होने की उम्मीद जतायी। इस तरह भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने संकेत दिया कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का योगी आदित्यनाथ में विश्वास बरकरार है। बी. एल. संतोष ने भाजपा के प्रदेश नेताओं और प्रदेश सरकार के मंत्रियों के बीच नियमित समन्व्य बैठकें करने का निर्देश भी दिया है।
बी. एल. संतोष ने 5 जून को अपनी रिपेार्ट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा को सौंप दी। जानकारी के मुताबिक बी. एल. संतोष यूपी की विभिन्न जातियों खासकर ओबीसी, दलित और ब्राह्मण में पकड़ मजबूत करने के लिए संपर्क कार्यक्रम शुरू करने, पार्टी में रिक्त पड़े पदों को भरने, कार्यकताओं और सरकार के प्रतिनिधि‍यों के बीच बेहतर समन्वय करने, 15 जुलाई से पहले होने वाले जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव को बेहद मजबूती के साथ लड़ने जैसे सुझावों से जुड़ी रिपोर्ट जे. पी. नड्डा को सौपी है।
यूपी भाजपा में अनुषांगिक संगठनों का नए सिेरे से गठन न होने से भी कार्यकर्ताओं में असंतोष है। उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में पिछड़ा मोर्चा, अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा समेत कुल सात मोर्चा है। इन सभी मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति के साथ जिला पर भी कार्यसमिति है। इसके अलावा बीजेपी के 45 प्रकोष्ठ हैं जिनमें प्रदेश और जिला स्तर पर समन्वयक की तैनाती होती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने 22 अगस्त, 2020 को नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा की थी। पिछले नौ महीने से मोर्चा और प्रकोष्ठ का गठन लंबित है। इससे प्रदेश भाजपा के नेताओं में आपसी तालमेल के अभाव की ओर संकेत मिलता है। मोर्चा और प्रकोष्ठ के गठन में देरी का मुद्दा बी. एल. संतोष की बैठक में भी उठा था। प्रदेश सरकार में अल्संख्यक आयोग, अनुसूचित जाति आयोग और अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा है। इसके अलावा कई निगमों  और बोर्डों में भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। इन पदों चयन न होने से कार्यकर्ताओं में दुविधा है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद प्रदेश भाजपा संगठन सभी राजनीतिक नियुक्ति‍यों को जून के अंत तक पूरा करने में जुट गया है। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा उत्तर प्रदेश का दौरा कर चुनावी तैयारियों का बिगुल बजाएंगे।
मोटे तौर पर यूपी की गुत्थी को सुलझाने के बाद ही पार्टी कार्यकर्त्ताओं, भाजपा के शुभचिंतकों और जनता के बीच सब कुछ चंगा है का संदेश देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दो दिन का दिल्ली दौरा हुआ जहां उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित राष्ट्रपति तक से मुलाकात की। इन सारी मुलाकातों के बाद आधिकारिक तौर पर यही संदेश दिया गया कि मुख्यमंत्री को सभी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। हालांकि घंटों चली इन मुलाकातों में परिस्थितियों से निपटने के मंत्र और सबकों साथ लेकर चलने का ही दर्शन छाया रहा।
तो आने वाले दिनों में यूपी में सब कुछ ठीक है और सेना लड़ने को तैयार है के संदेश के साथ संगठन में फेरबदल, मंत्रिमंडल में विस्तार और तमाम लोक कल्याणकारी योजनाओं के एलान की झड़ी भी लगते दिख सकती है और भाजपा के शीर्ष चेहरों की लगातार आमद भी बढ़ती दिखेगी। संकेत साफ है कि हर हाल में फतेह हासिल करने के लिए जो कुछ भी संभव होगा सब करेंगे।
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