HomeपंजाबUncategorizedSATIRE: बैताल फिर डाल पर

SATIRE: बैताल फिर डाल पर

ओ बैताल तूं क्यों परेशान है रे?
अब क्या बताऊं विक्रम, परेशान होना तो लाजिमी ही है।
क्यों क्या हुआ?
अरे मैं समझता था रात के अंधेरों पर हम बैतालों का राज है। पर चुनाव के इस मौसम में नेताओं ने हमारे हक पर डाका डालना शुरू कर दिया है। सभी नेता रात-रात भर जाग रहे हैं।
अच्छा ऐसी बात है?
हां एक संपादक महोदय ने भी मुझसे सहायता मांगी है। कहा कि बैताल महाराज आप ही बताएं आपके साथ हम लोग तो निशाचर हैं ही। पर इन नेताओं को क्या हो गया है। देर रात तक जगे रह रहे हैं। रात दो-दो बजे तक मीटिंग हो रही है। न हमें चैन से अखबार निकालने दे रहे हैं न आप जैसे बैतालों को आराम से रहने दे रहे हैं।
हां तो क्या हुआ बैताल, चुनाव का समय है। यह सब तो चलता ही रहेगा।
विक्रम तूं तो बड़ा ज्ञानी बनता फिरता है। फिर ये बता कि सभी राजनीतिक दल देर रात में ही उम्मीदवारों की लिस्ट क्यों जारी करते हैं। क्या वो सभी बैताल हैं जो उन्हें रात में इसकी सूचना दी जाए? हद है भाई। दिन में भी तो लिस्ट जारी कर सकते हैं।
है कोई जवाब तेरे पास।
तूं भी न बैताल कुछ भी बोलता रहता है।
जवाब है तो दे, नहीं तो मैं चला।
-कुणाल

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