HomeपंजाबUncategorizedQuestion of vaccine supply in poor countries?: गरीब मुल्कों में वैक्सीन आपूर्ति...

Question of vaccine supply in poor countries?: गरीब मुल्कों में वैक्सीन आपूर्ति का सवाल?

कोविड-19 की दूसरी लहर एक बार फिर सरकार और लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भारत और दुनिया के दूसरे मुल्कों में यह पुन: तेजी से पांव पसार रहा है। जिस तरह के हालात बन रहे हैं उससे तो साफ लगता है कि पांच राज्यों में चुनाव के बाद देश एक बार फिर ‘लॉकडाउन’ में वापस लौट सकता है। दोबारा शटर गिराने की नौबत आयीं तो आर्थिक हालात इतने बद्तर हो जाएंगे कि संभाले नहीं संभलेंगे। कोरोना संक्रमण की वजह से जहां आर्थिक हालात बिगड़ रहे हैं वहीं अमीर और गरीब देशों के बीच वैक्सीनेशन को लेकर असमानता भी देखने को मिल रही है।
गरीब देशों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन उपलब्ध कराना एक चुनौती बन गया है। अब तक वैक्सीन की जो उपलब्धता देखी गयी है वह अमीर देशों में है। गरीब मुल्क इस दौड़ में काफी पीछे हैं। अमीर देशों की यह नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी है कि वह आर्थिक रुप से कमजोर देशों को भी कोविड-19 की वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराएं, लेकिन ऐसा फिलहाल संभव नहीं दिखता है। क्योंकि जिनके पास पैसा है वह महंगी वैक्सीन भी खरीद सकते हैं, लेकिन जिन देशों के आर्थिक हालात कमजोर हैं उनके लिए यह टेढ़ीखीर होगी। वैक्सीन को लेकर जो तथ्यगत आंकड़े आए हैं वह अमीर और गरीब देशों की बीच असमानता बढ़ाते दिखते हैं। दुनिया के देशों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। अपने देश के नागरिकों को सुरक्षित रखने के साथ गरीब मुल्कों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
अमीर और गरीब मुल्कों के बीच के फासले को आप आसानी से समझ सकते हैं। ब्रिटेन में 58 और अमेरिका में 38 फीसदी वयस्कों को वैक्सीन लग चुकी है। ब्रिटेन भारत से 45 लाख डोज ले चुका अभी वह 50 लाख और हासिल करना चाहता है। जबकि अर्जेंटीना, ब्रांजील, म्यांमार और सउदी अरब और दक्षिण अफ्रीका एक करोड़ 20 डोज ले चुके हैं। संयुक्त अरब अमीरात और कनाडा क्रमश पांच और दो लाख डोज हासिल कर चुके हैं। जबकि कोवैक्स अपने सदस्य देशों को इस साल निर्धारित लक्ष्य का सिर्फ 27 फीसदी ही वैक्सीन उपलब्ध करा सकता है।
अधिकांश देश भारत से वैक्सीन लेना चाहते हैं। क्योंकि फाइजर और दूसरी कंपनियों के मुकाबले यहां की वैक्सीन सस्ती और रख रखाव के मामले में अव्वल है। जिसकी वजह से भारत से वैक्सीन लेने की होड़मची है। इस हालात में गरीब देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का कावैक्स ही एक प्रमुख माध्यम है। ‘कोवैक्स’ ने भारत के सीरम इंस्टीट्यूट और दक्षिण कोरिया की एक कंपनी से करार किया है। गरीब देशों को कोवैक्स दो अरब डोज की आपूर्ति सुनिश्चित की है। लेकिन अभी तक उसका 20 फीसद हिस्सा के भी आपूर्ति नहीं हो पायी है। जबकि कोवैक्स अभी सिर्फ तीन करोड़ 20 लाख डोज की आपूर्ति कर सका है। 86 फीसदी वैक्सीन भारत से आपूर्ति होनी है। लेकिन भारत में बढ़ते कोविड संक्रमण की वजह से सरकार ने वैक्सीन निर्यात पर अस्थायी रोक लगा रखी है। क्योंकि बढ़ते टीकाकरण की वजह से वैक्सीन की डिमांड अधिक बढ़ गयी है।
दुनिया के 14 फसदी अमीर मुल्कों ने अपने लिए 53 फीसदी वैक्सीन की आपूर्ति कर लिया है। जबकि कावैक्स गरीब देशों को साल के अंत तक सिर्फ 27 फीसदी वैक्सीन ही उपलब्ध करा पाएगा। दुनिया भर में अब तक एक अरब डोज का उत्पादन हो चुका है। जबकि 2021 तक गरीब देशों में रहने वाले हर दस व्यक्ति में नौ लोगों को वैक्सीन नहीं लग पाएगी। अमीर और गरीब मुल्कों के बीच का अंतर आप इसी से समझ सकते हैं।
गरीब देशों जिस संगठन के माध्यम से वैक्सीन उपलब्ध करायी जानी है उसका नाम कोवैक्स है। इसमें कुल 192 देश शामिल हैं। समझौते के अनुसार हर देश को उसकी आबादी के अनुसार 20 फीसदी वैक्सीन उपलब्ध करायी जानी थी।
लेकिन अभी इसकी आपूर्ति संतोष जनक नहीं है। कोवैक्स की 85 फीसदी से अधिक वैक्सीन की आपूर्ति भारत करेगा। भारत फरवरी में घाना जैसे मुल्क को छह लाख डोज की आपूर्ति कर चुका है। पड़ोसी और गरीब मुल्कों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन उपलब्ध कराना भारत की मंशा रही है, लेकिन देश में बढ़ते संक्रमण की वजह से इसमें बांधा पहुंच सकती है। क्योंकि भारत में वैक्सीन की मांग बढ़ गई है। वैक्सीनेशन की प्रक्रिया और और तेज किया गया है।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। यह इनके निजी विचार हैं।)

SHARE
RELATED ARTICLES

Most Popular