2012 – 13 में जब सुप्रीम कोर्ट ने भरी अदालत में सीबीआई को एक पिजड़े का तोता कहा तो तब खूब हो हल्ला मचा। तत्कालीन सीबीआई प्रमुख से जब पत्रकारों ने पूछा कि, ” सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर कि सीबीआई पिंजड़े का तोता है, आप की क्या राय है,” तो, सीबीआई प्रमुख ने कहा कि अदालत ने यह बात सही कही है। इतना कह कर सीबीआई प्रमुख गाड़ी में बैठ गए। सीबीआई प्रमुख ने जो उत्तर दिया वही उत्तर कोई भी अधिकारी होता तो, वह भी वही कहता। 2012 से लेकर 2014 तक, यूपीए – 2 का पराभव का काल था, फिर तो 2014 में यूपीए सत्ता से बाहर ही हो गयी। उस दौरान, सीएजी हर हफ्ते कोई न कोई घोटाला ढूंढ लेते थे और अन्ना हज़ारे का आंदोलन चल ही रहा था। उस समय की घटनाओं का स्मरण कीजिए तो लगता है कि देश की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार है और पहले इस राजरोग से निदान पाना ज़रूरी है। सार्वजनिक जीवन मे भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिये लोकपाल की नियुक्ति की मांग उठी, सीबीआई की तफतीशो में राजनीतिक दखलंदाजी रोकने की मांग तेज हुयी, और फिर इन सारी गतिविधियों का परिणाम हुआ कि 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर आ गयी। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आने वाली नयी सरकार, अब चाहे जैसी लगती हो, पर तब तो एक अवतार सरीखी लगती थी।