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वैक्सीन का ट्रायल देने वाले कोरोना योद्धा सुरिंदर बरनाला ने बनाई फिल्म ‘मॉय ग्रेट डैड’ -कोरोना वेरियर्स

अखिलेश बंसल, बरनाला:

जनवरी 2021 से भारतवर्ष को नसीब होने से पहले वेक्सीन का सर्वप्रथम ट्रायल दे चुके कोरोना योद्धा सुरिंदर सिंगल बरनाला पर बनी फिल्म ‘मॉय ग्रेट डैड’ -कोरोना वेरियर्स बनी है। यह फिल्म हर व्यक्ति को बार-बार गंभीर करने वाली है, परिवारों की विचारधारा बदलने वाली है तथा देश की संस्कृति व शक्ति को बढ़ावा देने से जुड़ी है। यह फिल्म 15 अगस्त को रिलीज करने की तैयारी की जा रही है।  ‘मॉय ग्रेट डैड’ कोरोना वेरियर्स के नाम से बनाई गई इस फिल्म की शूटिंग मुंबई के अंदर ही हुई है। फिल्म में डैड (पापा) की भूमिका खुद सुरिंदर सिंगल तथा उनके बेटे के रोल में विदेश में रहते भारत के मूल निवासी कलाकार गुरप्रीत उप्पल ने अदा की है, जो खुद दोनों ही फिल्म के प्रोड्यूसर भी हैं। पुत्रवधू की भूमिका मुंबई में रहती टैलीवीजन कलाकार रेखा शर्मा ने निभाई है। लेखक तथा निर्देशक नवदीप मौदगिल हैं, फिल्म की स्टोरी का संपादन पारुल शुक्ला ने किया है। फिल्म की प्रस्तुति मुयूजिक फीवर एंटरटेनमैंट एवं स्काई आर्ट इंटरप्राईसेस ने की है। पूरी फिल्म करीब 45 मिनट की है। जिसे 15 अगस्त के दिन रिलीज करने की तैयारी है।
दो पीढिय़ों की विचारधारा पर आधारित फिल्म
फिल्म की स्टोरी कुछ इस प्रकार से है कि पिता बाजार से सब्जी वगैरह खरीदने जाता है और कम दाम में बढिय़ा और ज्यादा सामान लेकर घर पहुंचता है, घर आते ही बहू-बेटा घर का फर्नीचर एक्सचेंज करने की योजना में हैं। ससुर से बहू कहती है कि अब घर की काफी चीजें पुरानी हो गई हैं। ससुर कहता है फिर तो मैं भी पुराना हो गया हूं। इसी दौरान टीवी पर बहू अपने ससुर का चेहरा देखती हैं…………..चिल्ला उठती है…….अरे सुनते हो देखो पापा वेक्सीन लगवा रहे हैं…….बहू-बेटा कहती है पापा सॉरी……हमने अब समझा पुरानी ही चीजों में ही दम है…….ओल्ड-इज-गोल्ड। इतने में दोस्तों, रिश्तेदारों के फोन आना शुरू हो जाते हैं। पापा को मिलता सम्मान देख बहू बेटा भी फूले नहीं समाते।
यह हैं सुरिंदर सिंगल बरनाला 
‘मॉय ग्रेट डैड’ -कोरोना वारियर्स के प्रोड्यूसर सुरिंदर सिंगल बरनाला-पंजाब से हैं। वैक्सीन ट्रायल में शामिल होने के चार महीने गुजर जाने के बाद सुरिंदर सिंगल बरनाला ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि वह ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज हैं, जिसकी रेगुलर दवाएं भी ले रहे हैं, लेकिन वैक्सीन की डोज लेने के बाद पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्हें किसी प्रकार की कोई भी नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला है। सिंगल ने लोगों को जागरूक करते बताया था कि वे वैसे ही नहीं कह रहे, बल्कि इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनके ऊपर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और सीरम इंस्टीट्यूट पुणे की कोविशील्ड वैक्सीन का ट्रायल किया गया है। कोरोना वैक्सीन लगवाने जा रहे हैं तो बिल्कुल भी घबराएं नहीं, आपको लगाई जाने वाली कोरोना वैक्सीन एकदम सुरक्षित है।
….और कारवां बनता गया
सुरिंदर सिंगल ने सितंबर-2020 के दौरान एक समाचार पत्र में (कोरोना वैक्सीन के छह माह के ट्रायल के लिए लोगों से मांगे गए आवेदन) का प्रकाशित विज्ञापन देखा और बिना अपने परिवार को बताए वैक्सीन के ट्रायल देने के लिए चुपके से आवेदन कर दिया। मोबाइल फोन से अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। दो दिन बाद पीजीआई पहुंच गए। पीजीआई में उनका फुल बॉडी चेकअप किया गया। करीब छह घंटे बाद घर पहुंचे, तब भी परिवार को कुछ नहीं बताया। दो दिन बाद फिर पीजीआई पहुंचे तो वहां दोबारा शरीर के सारे टेस्ट हुए। रिपोर्ट्स सही होने पर 30 सितंबर 2020 को उनकी बायीं बाजू पर वैक्सीन लगाई गई। वैक्सीन लगाने के बाद आधा घंटा वहीं पर आराम करवाया गया। घर भेजने से पहले उनको एक डायरी दी गई जिसमें 28 दिन तक बॉडी में होने वाले बदलाव की सूची बनाने को कहा गया। 28 दिन बीतने पर सुरिंदर सिगल को फिर बुलाया गया, पहले की तरह सभी टेस्ट हुए और 28 अक्टूबर को वैक्सीन की दूसरी डोज दी गई। इसके एक महीने के बाद पीजीआई बुलाया गया और बाडी चेकअप किया गया। सभी आवेदकों की रिपोर्ट सकारात्मक होने पर पीजीआई की ओर से वैक्सीन को क्लीन चिट दी गई। जिसके बाद वैक्सीनेशन-टीकाकरण इस कदर शुरू हुआ कि वैक्सीनेशन करवाने आज तक लोगों की भीड़ लग रही है।
पिता के नक्शे कदम चल खुद को किया देश के लिए समर्पित
बता दें कि वैक्सीन ट्रायल में शामिल होने वाले 67 वर्षीय सुरिंदर सिंगल बरनाला स्वतंत्रता संग्रामी स्वर्गीय रामेश्वर दास के पुत्र हैं। पीजीआई से खुशी भरा चेहरा लेकर घर लौटे सुरिंदर सिंगल ने वैक्सीनेशन के सफल ट्रायल होने के बारे में जैसे ही अपनी पत्नी सुधा सिंगल को जानकारी देने वैक्सीनेशन ट्रायल की भरी डायरी थमाई और बड़े हर्ष से कहा कि मैं वैक्सीन लगवा कर आया हूं तो वह चौक पड़ीं। पत्नी द्वारा नाराजगी भरे किए गए शब्द बाणों की ऐसी वर्षा हुई, जो पूरी जिंदगी में सुरिंदर को झेलना तो दूर की बात देखने को भी नहीं मिली। उसके बाद रिश्तेदारों के कॉल भी आने लगे, लेकिन उन्होंने सभी को पिता समेत सभी देशभक्तों की उदाहरण दी।
बरनाला से मुंबई तक का सफर
सुरिंदर सिंगल जिन्होंने अपने नाम के साथ बरनाला को अलग नहीं किया। वह कुछ कारोबार करने के लिए वर्ष 1973 के दौरान बरनाला से चंडीगढ़ चले गए, जहां उन्होंने पहले दोस्त के साथ स्टील इंडस्ट्री का काम किया, फिर अपने दम पर स्टील पाइप इंडस्ट्री लगाई। कारोबार के सिलसिले से मुंबई पहुंचे वहां कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में आए कि फिल्म इंडस्ट्री जा पहुंचे। कुछ महीने गुजार चंडीगढ़ लौटे तो पंचकूला में न्यूज़-बुक्स का बिजनेस शुरू किया, लेकिन मुंबई नगरी का पीछा नहीं छोड़ा। हालात यह हो गए कि एक पांव पंचकुला तथा दूसरा पांव मुंबई। यह सिलसिला आज तक निरंतर है। सुरिंदर सिंगल बरनाला ने फिल्म  ‘मॉय ग्रेट डैड’ -कोरोना वारियर्स से पहले पंगे पे पंगा समेत कुछ अन्य फिल्में भी तैयार की हैं।

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