Himachal News: हिमाचल के डॉ. जोगेंद्र हाब्बी संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

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डॉ. हाब्बी के नेतृत्व में लोक कलाकारों ने पारंपरिक लोक विधाओं को आधुनिकता की अंधी दौड़ से अलग रखते हुए उनके मूल स्वरूप को संरक्षित करने पर विशेष जोर दिया।
Himachal News:डॉ. हाब्बी के प्रयासों से सिरमौरी नाटी और हिमाचल की लोक सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।
Himachal News:डॉ. हाब्बी के प्रयासों से सिरमौरी नाटी और हिमाचल की लोक सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।

सिरमौरी नाटी को वैश्विक पहचान दिलाने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिला सम्मान
Himachal News, (आज समाज), शिमला: संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की संगीत नाटक अकादमी की ओर से विभिन्न कला क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली देश की विभूतियों को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया है। समारोह में जिला सिरमौर की समृद्ध एवं विलुप्तप्राय लोक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को लोकनृत्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से अलंकृत किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल और संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

तीन दशकों से लोक संस्कृति के संरक्षण में जुटे हैं डॉ. जोगिंदर हाब्बी

डॉ. जोगिंदर हाब्बी पिछले तीन दशकों से अधिक समय से सिरमौर की पारंपरिक लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सिरमौरी नाटी सहित पारंपरिक लोकगीतों, लोकनृत्यों, लोकवाद्यों और लोक परिधानों की मौलिकता को बनाए रखते हुए इन्हें देश और विदेश के विभिन्न मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डॉ. हाब्बी के नेतृत्व में लोक कलाकारों ने पारंपरिक लोक विधाओं को आधुनिकता की अंधी दौड़ से अलग रखते हुए उनके मूल स्वरूप को संरक्षित करने पर विशेष जोर दिया। रीमिक्स गीतों और इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्रों से दूर रहकर पारंपरिक लोकवाद्यों, लोकगीतों, लोकनृत्यों और लोक परिधानों के माध्यम से सिरमौर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मंचों पर प्रस्तुत किया गया।

मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी किए जा चुके सम्मानित

डॉ. हाब्बी के प्रयासों से सिरमौरी नाटी और हिमाचल की लोक सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। सिरमौरी नाटी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में उनके प्रयास विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड्स में दर्ज उपलब्धियों के रूप में भी सामने आए हैं। उनकी दीर्घकालीन सांस्कृतिक साधना के लिए विदेश के एक विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है।

पद्मश्री विद्यानंद सरैक ने दी बधाई

पद्मश्री विद्यानंद सरैक ने हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों के सैकड़ों लोक कलाकारों ने इस गौरवपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए डॉ. हाब्बी को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मान हिमाचल की लोक कलाओं के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

डॉ. हाब्बी ने जताया आभार

पुरस्कार प्राप्त करने के बाद डॉ. जोगिंदर हाब्बी ने अपनी इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति को व्यापक मंच तक पहुंचाने में समाज, कलाकारों और मीडिया के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। डॉ. हाब्बी ने सभी से भविष्य में भी अपना स्नेह, आशीर्वाद और सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया।

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