Homeहरियाणायमुनानगर14 अगस्त को मनाया जाएगा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस

14 अगस्त को मनाया जाएगा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस

प्रभजीत सिंह लक्की, यमुनानगर:
शिक्षामंत्री कंवर पाल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने फैसला लिया है कि 14 अगस्त को कुरुक्षेत्र में विभाजन विभीषिका दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस दौरान प्रदेशभर से आए लोगों को विभाजन की विभीषिका में बलिदान देने वालों के बारे में अवगत करवाया जाएगा।

विभाजन में जान देने वालों को देंगे श्रद्धांजलि

यह दिवस उन सभी लोगों के लिए एक श्रद्धांजलि के तौर पर है। जिन्होंने विभाजन के समय अपनी जान गंवाई या अपने घरों को छोड़ा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी शामिल होंगे। शिक्षामंत्री ने कहा कि देश जब आजाद हुआ, तब एक ओर जहां खुशी थी, वहीं दूसरी ओर देश को बंटवारे का दंश भी झेलना पड़ा। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यह विभाजन साधारण नहीं था, वैसे कोई विभाजन साधारण नहीं होता लेकिन भारत का मामला और भी दर्द भरा रहा है।

मसाना में बनेगा विश्व स्तरीय शहीदी स्मारक

उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढियों को इस दिन के माध्यम से याद दिलाया जाएगा कि देश की आजादी के जश्न से पहले हमें उन्हें याद करना चाहिए, जिन्होंने पीड़ा और दर्द झेला। इसी याद को बनाए रखने के लिए प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर विभाजन विभीषिका स्मारक बनाए जा रहे हैं। कुरुक्षेत्र के मसाना गांव में देश का विश्व स्तरीय शहीदी स्मारक बनाया जा रहा है। इस स्मारक पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस मानवीय कार्य के लिए पंचनद स्मारक ट्रस्ट ने 25 एकड़ भूमि सरकार को दान में देने की घोषणा की है। ऐसा ही एक स्मारक फरीदाबाद के बडखल में बनाया गया है।

सामाजिक एकजुटता का देंगे संदेश

शिक्षामंत्री कंवरपाल ने कहा कि यह दिन हमें याद दिलाता रहेगा कि सामाजिक एकता के सूत्र टूटते हैं तो देश भी टूट जाया करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को मनाने की घोषणा इसी उद्देश्य से की थी कि हर भारतीय इस दिन को याद कर राष्ट्र की एकता के प्रति प्रेरित और समर्पित हो। यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए प्रेरित करेगा। इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी। आपसी एकता बढ़ेगी तो वैमनस्यता अपने आप दूर होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें वसुधैव कुटुम्बकम का पाठ पढ़ाती है। हमें जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर सोचना चाहिए।

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