Homeहरियाणायमुनानगरबाबा रामकुमार की मौत के मामले में डीसी और एसपी को नोटिस

बाबा रामकुमार की मौत के मामले में डीसी और एसपी को नोटिस

संजीव कुमार, रोहतक: औघड़ पीर डेरे के बाबा रामकुमार नाथ की मौत के मामले में अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने रोहतक के उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक से जबाव मांगा है। आयोग की तरफ से अधिकारियों को इस बावत नोटिस भेजा गया है और सात दिन के अंदर नोटिस का जबाव देने को कहा गया है। दरअसल मठ से औघड पीर साधु संतों की समाधियां हटाने को लेकर बाबा रामकुमार नाथ और अन्य संतों ने आंदोलन छेड़ रखा था। इसी दौरान प्रशासन के अधिकारियों ने बाबा रामकुमार नाथ व अन्य बाबाओं को डेरे से निकाल कर अपने कब्जे में ले लिया था। इसी दौरान बाबा रामकुमार नाथ की कोरोना से मौत हो गई। प्रशासन के अधिकारियों ने बाबा रामकुमार नाथ को स्माधि देने के बजाय उनका संस्कार करवा दिया। बाबा रामकुमार नाथ की मौत को संदिग्ध बताते हुए मिशन एकता समिति की प्रदेश अध्यक्ष कांता आलडिया ने मामले की जांच कराने के लिए एससीएसटी आयोग को भी शिकायत की थी। समिति ने प्रशासनिक अधिकारियों पर एक महंत के दबाव में आकर कारवाई न करने का आरोप लगाया था। समिति प्रदेश अध्यक्ष कांता आलडिया का कहना है कि जब तक बाबा रामकुमार नाथ की मौत के मामले में न्याय नही मिल जाता तब तक उनका आदोलन जारी रहेगा। 29 अप्रैल को अस्थल बोहर स्थित औघड पीर डेरे के महंत रमेशनाथ के गुरू भाई बाबा रामकुमार नाथ की कोरोना से मौत हो गई थी।

इस मामले को लेकर समिति ने प्रशासन के अधिकारियों पर आरोप लगाए थे कि बाबा रामकुमार नाथ की मौत मानसिक दबाव के चलते हुई थी, क्योकि महंत रमेशनाथ व बाबा रामकुमार नाथ सहित अन्य बाबाओं को प्रशासन के अधिकारियों ने डेरे से बेदखल करके धारा 145 के तहत डेरे को अपने कब्जे में ले लिया था। जिसका साधु संतों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा था और इसी दौरान बाबा रामकुमार नाथ बिमार हो गए। मिशन एकता समिति ने मामले को लेकर डॉ. अम्बेडकर चौक पर भी प्रदर्शन किया और बाबा रामकुमार नाथ की मौत के मामले की जांच की मांग की। समिति प्रदेश अध्यक्ष कांता आलडिया का कहना है कि बाबा रामकुमार नाथ की मौत नहीं बल्कि उन्हें मरने के लिए मजबूर किया गया था। बाबा का संस्कार भी परम्परा अनुसार नहीं किया गया और स्माधि देने की बजाए प्रशास ने आनन फानन में उनका संस्कार करा दिया। मामले पर संज्ञान लेते हुए राष्टीय एससीएसटी आयोग ने उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक से जबाव मांगा है। समिति की प्रदेश अध्यक्ष कांता आलडिया का कहना कि बाबा मस्तनाथ मठ के महंत के दबाव में प्रशासन के अधिकारियों ने कोई कारवाई नहीं की और अभी भी मठ में स्माधियों का निर्माण नहीं किया गया है। कांता आलडिया ने आरोप लगाया कि मठ के महंत के दबाव के चलते प्रशासन ने उन्हें औघड पीर साधु संतों की स्मृति में लगने वाले वार्षिक कार्यक्रम की भी अनुमति नहीं दी है, जिससे साफ होता है सरकार व प्रशासन दलित एवं पिछडा वर्ग समाज की विरोधी है। उन्होंने कहा कि औघड पीर साधु संतों की स्मृति में कार्यक्रम की अनुमति न देने से समाज के लोगों में भारी आक्रोश है।

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