Homeराज्यहरियाणाहरियाणा के 1699 गांवों में पानी की किल्लत

हरियाणा के 1699 गांवों में पानी की किल्लत

-करीब 25 फीसदी ग्रामीण एरिया में पानी की कमी
-निरंतर और ज्यादा नीचे जा रहा है भूमिगत पानी का स्तर
-रुफ टॉप वॉटर- रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक अपनाना बेहद जरूरी
डॉ. रविंद्र मलिक, चंडीगढ़:

घटते जल संसाधन देशभर में चिंता का विषय हैं। हरियाणा की स्थिति भी कोई जुदा नहीं है और उनको बचाने के लिए सरकार अपने स्तर पर हरसंभव कोशिश कर रही है, ताकि आने वाली नस्लों के लिए भी कुछ छोड़कर जाएं। जिस तरह से प्रदेश के कई जिलों में पानी का लेवल निरंतर घट रहा है, वो बेहद चिंता का विषय है। सरकारी आंकड़ों में सामने आया है कि हरियाणा के करीब करीब 25 फीसदी गांव ऐसे हैं जहां पानी की कमी है और लोगों को इसके चलते दिक्कत पेश आ रही है। इतना ही नहीं, इससे भी चिंता का विषय ये है कि इस स्थिति से अवगत होते हुए भी लोग जल संरक्षण को लेकर कैजुअल अप्रोच को नहीं छोड़ रहे। ये भी बता दें कि जीटी रोड पर पड़ने वाले हरियाणा के ज्यादातर जिलों में स्थिति लगातार खराब हो रही है और समय से नहीं संभले तो चीजों का हाथ से निकलना तय है। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 54 फीसदी इलाके में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।
हरियाणा में करीब 7,000 गांव
बता दें कि हरियाणा में करीब 7 हजार गांव हैं। विभागीय डाटे के अनुसार ऐसे गांव लगातार बढ़ रहे हैं, जहां पानी की किल्लत निरंतर बढ़ रही है। प्रदेश के 1699 गांवों में पानी की कमी है तो ऐसे में समझना आसान है कि फिलहाल प्रदेश में क्या स्थिति है और आने वाले समय में चीजें क्या हो सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर पानी की कमी ने सबको सकते और चिंता में डाल दिया है कि आने वाले समय में क्या होगा।
हरियाणा के 85 ब्लॉक में भूमिगत जल खत्म होने की कगार
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के कई जिलों में हर साल भूमिगत जल एक मीटर तक नीचे जा रहा है। संबंधित विभाग द्वारा कुछ समय पहले केंद्र सरकार को एक प्रेजेंटेशन दी थी, जिसमें इस बारे बताया गया था। प्रदेश में 141 ब्लॉक हैं, इनमें से 85 ब्लॉक में पानी का बहुत ज्यादा दोहन (ओवर एक्सपलॉयटिड) किया गया है। इन जगहों पर भूमिगत पानी बिल्कुल नीचे चला गया है। वहीं तकनीकी तौर पर बात करें 12 ब्लॉक ऐसे हैं, जहां पानी को लेकर स्थिति काफी क्रिटिकल है और 14 ब्लॉक ऐसे हैं जहां स्थिति सेमी क्रिटिकल है। कुल 141 में से 30 ब्लॉक ही ऐसे हैं, जिनको सेफ की कैटेगरी में रखा गया है।
प्रदेश के 50% इलाकों में मानसून सामान्य नहीं
आंकड़ों के अनुसार ये भी सामने आया है कि मानसून की कमी भी लगातार परेशानी का सबब बनी हुई है। साल 1990 से लेकर 2019 तक इस अवधि में बड़े स्तर पर मानसून कम रहा। साल 2012 से लेकर 2019 तक छह बार बरसात कहीं कम हुई है, जिसके चलते दिक्कतें बढ़ीं। साल 2018 में सामान्य बरसात हुई थी। हरियाणा के दक्षिणी-पश्चिमी इलाकों जोकि राजस्थान से लगते हैं, से लेकर उत्तरी-पूर्वी इलाकों जो कि शिवालिक की पहाड़ियों से सटे हैं, में औसतन 313 एमएम से लेकर 862 तक बरसात होती है। करीब 50 फीसदी इलाकों में तो बरसात 500 एमएम से कम है।
जीरी की फसल का विकल्प ढूंढें
प्रदेश के 8 जिले, खासकर जीटी रोड बेल्ट, जहां भूमिगत पानी का स्तर नीचे जा रहा है। इन जिलों में पानी की कमी के पीछे जो सबसे बड़ा कारण है, वो है यहां बड़े पैमाने पर धान की फसल की खेती। इसमें अन्य किसी फसल की तुलना में कहीं ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। इसको देखते हुए सरकार ने इस दिशा में कदम उठाते हुए एक स्कीम भी शुरू की है, जिसके तहत किसानों को विकल्प दिया था। जीरी की फसल की जगह अन्य कोई फसल उगाने वाले किसानों को सब्सिडी दी जाएगी। शुरुआती चरण में प्रदेश में करीब 50 हजार एकड़ जमीन पर किसानों ने धान की जगह किसी अन्य फसल का विकल्प चुना। प्रारंभिक तौर पर इसे अच्छी शुरुआत माना जा सकता है।
वर्तमान में रुफटॉप वॉटर-रेन वॉटर हार्वेस्टिंग जरूरी
सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पानी की किल्लत की समस्या से निकलने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें से एक है लोगों को चाहिए कि बरसाती पानी संरक्षित किया जाए। इसी कड़ी में सरकार निरंतर कोशिश कर रही है कि लोगों को रूफटॉप वॉटर- रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के बारे में जागरूक किया जाए। रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए छत पर बरसे पानी को किसी पाइप या माध्यम के जरिए धरती में उतारने का काम किया जाता है। वहीं रेन वॉटर हारवेस्टिंग में बरसात के पानी को व्यवस्थित तरीके से सही जगहों पर धरती में उतारा जाता है या फिर ये भी कर सकते हैं कि बरसाती पानी को कोई ढांचा बनाकर संरक्षित कर लिया जाए और जरूरत के अनुरूप इस पानी का इस्तेमाल करते रहें। कुछ जगह सरकारी भवनों पर रुफ टॉप-रेन वॉटर हार्वेस्टिंग लगाना अनिवार्य कर दिया है जो कि एक सही कदम है। सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर सतबीर सिंह कादयान ने बताया कि विभाग लगातार लोगों को जल संरक्षण व संचयन बारे जागरूक कर रहा है। जल शक्ति अभियान के जरिए जल संरक्षण की दिशा में हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। लोगों को लगातार रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग के बारे में बताया जा रहा है कि वो कैसे बरसात के पानी का सही उपयोग कर सकते हैं। ये तकनीक बेहद साधारण है और कम खर्च वाली है। छत पर एकत्रित हुए बरसात के पानी को पाइप या किसी अन्य माध्यम के जरिए धरती में पहुंचाना है। सरकार इमारतों में भी इसको जरूरी कर दिया है।

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