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रोहतक के दो सगे भाइयों को दिल्ली पुलिस ने वित्तीय धोखाधड़ी, जालसाजी के मामले में किया गिरफ्तार

संजीव कुमार, रोहतक :
वित्तीय धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुये वी इंस्पायर फैसिलिटीज प्राइवेट लिमिटेड, पालम विहार, गुरुग्राम के मुख्य आरोपियों विकास ढुल और अरुण ढुल, जो मूल रूप से सनसिटी सेक्टर 35, रोहतक के निवासी है, को कल द्वारका से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने जय प्रकाश द्वारा, एबीपी ट्रेवल्स एंड फैसिलिटी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से स्वरूप नगर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर मुख्य आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने और कई कंपनियों की भारी मात्रा में फर्जी रसीद जारी कर वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी  फैसिलिटी और बिजनेस मैनेजमेंट कंपनी स्थापित करके फर्जी टेंडर्स, फर्जी बिल और भुगतान के आरोप में कार्रवाई की है। आरोपी पर आईपीसी की धारा 409, 420, 467,468, 471, 120 बी और 25/30 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को 6 दिन की पुलिस हिरासत में लिया गया है। जांच के अनुसार, लगभग 500 फर्जी कर्मचारियों का पता चला है जिन्होंने भारी मात्रा में फर्जी बैंक खाते खोले थे। आरोपी द्वारा चलाई जा रही कंपनी में पहले ही 34 करोड़ रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी की सूचना मिली है और जीएसटी विभाग की ओर से ह्यकारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।

पुलिस अन्य आरोपियों निमेश वशिष्ठ, अनिल शर्मा, दीपिका ढुल और अन्य की तलाश कर रही है जो कई अपराध कर चुके हैं। इनके खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा में वित्तीय धोखाधड़ी की प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता जय प्रकाश ने कहा, “हमारी कंपनी के आंतरिक आडिट के दौरान धोखाधड़ी और वित्तीय धोखाधड़ी की सूचना मिली थी। हमने तुरंत पुलिस को सूचित किया और एफआईआर दर्ज कराई। इसकी गिरफ्तारी हमारे लिए एक बड़ी राहत है और हमें उम्मीद है कि हमें जल्द ही न्याय मिलेगा।” एफआईआर के अनुसार मुख्य आरोपी अन्य लोगों के साथ कंपनियों को धोखा देने और वित्तीय धोखाधड़ी करने के लिए एक फर्जी  फैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी चला रहा था। आरोपी पर बैंक खातों को संभालने, ग्राहकों के चालान, विक्रेता चयन और अन्य सहित अनधिकृत दिन-प्रतिदिन के संचालन करने का आरोप लगाया गया है। उन पर कई फर्जी विक्रेताओं को नियमित भुगतान करने का भी आरोप लगाया गया है जो कंपनी के आंतरिक आडिट के दौरान पता चला था।

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