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भिवानी: युवा शिक्षक वर्ग और विद्यार्थियों के लिए आदर्श बनी हैं ममता पालीवाल

पंकज सोनी, भिवानी:
कोई इस मुगालते में बिल्कुल न रहे कि सरकारी स्कूलों में अच्छे टीचर या होनहार बच्चे नहीं हैं। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भिवानी की गणित की प्रवक्ता ममता पालीवाल ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए नामित होकर लोगों के इस मिथक को मित्था साबित करने का काम किया है। ममता से पढ?े वाली छात्राएं भी उनकी तरह ही नए-नए आईडिया क्रीएट कर रही हैं और राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभागी बन स्कूल और भिवानी का नाम रोशन कर रही हैं। ममता के अनुसार बच्चों को किसी भी कांसेप्ट को समझने के लिए उसके बेसिक को समझना आवयशक है और यह जानना कि आखिर  इस फॉमूले की आवश्यकता क्यों पड़ी है? उपायुक्त जयबीर सिंह आर्य ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने जाने पर जिला प्रशासन की तरफ से ममता को बधाई दी है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में चार अगस्त को पंचकुला में चयन प्रक्रिया के दौरान प्रवक्ता ममता पालीवाल ने वहां पर मौजूद आठ सदस्यों की नेशनल ज्यूरी के समक्ष अपनी दस मिनट की पीपीटी प्रस्तुत की थी। पीपीटी के माध्यम से ममता ने स्वयं के  द्वारा तैयार किए गए टीचर लर्निंग मैटीरियल की बड़ी ही प्रभावी प्रजेंटेशन दी थी, जिसके आधार पर उनका नाम राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है, जो कि उनको पांच सितंबर को अवार्ड से नवाजा जाएगा। उन्होंने अपनी लर्निंग मैटीरियल में गेम के माध्यम से सीखने की पद्धति को दशार्या है, जिसके माध्यम से वे छात्राओं को स्कूल में  स्थापित अटल टिंकरिंग लैब में पढ़ा रही हैं। यह जिला की सरकारी स्कूलों की एकमात्र ऐसी लैब है, जहां बच्चों को खेल-खेल में नए-नए आईडिया सिखाए जाते हैं। ममता छात्राओं को केलकूलेशन के शॉर्ट फॉमूले सिखाती हैं, जो कि बहुत ही जरूरी हैं। इसी प्रकार से वे प्लस व माईनस के बारे में नए-नए तरीकों से पढ़ाती हैं। वे गणित के कई तरीकों को भी थ्री-डी शेप्स के माध्यम से सिखाती हैं। क्रम से किसी भी समीकरण को समझाने के लिए उन्होंने मैथोनोपोली गेम का तरीका डिजाईन किया है।
ममता की तरह ही प्रतिभावान हैं उनकी छात्राएं
न केवल ममता बल्कि उनकी छात्राएं भी नए-नए आईडिया के वीडियो गेम बनाने लगी हैं। ममता से पढ़ी दो छात्राएं पिछले ही साल सुपर 100 में पहुंची हैं। ऐसी अनेक ऐसी छात्राएं रही हैं। 12 वीं कक्षा की छात्रा हिता ने आॅनलाइन ट्रेनिंग लेकर मैथ के कई वीडियो गेम बनाए हैं। इसी प्रकार से पुनीता दो बार स्कूल की तरफ गुरुग्राम में हर साल आयोजित होने वाली जवाहर लाल नेहरू साईंस एवं मैथ एक्जीबीशन में प्रतिभागी बन चुकी है। इसी कक्षा की सीमा व वर्षा भी उनकी होनहार छात्राओं में शामिल हैं।
स्टेट लेवल पर रहा है दूसरा स्थान
ममता के अथक प्रयासों की बदौलत स्कूल राज्य व नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले रहा है। स्कूल ने वर्ष 2020 में स्टेट लेवल की प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया है। ममता को वर्ष 2020 में नीति आयोग भारत सरकार की तरफ से भी बेस्ट एटीएल इंचार्ज का पुरस्कार खिताब मिल चुका है।
कोविड के दौरान अपने यू ट्यूब चैनल से बच्चों को पढ़ाया
कोविड महामारी के दौरान जब बच्चे मजबूरीवश अपने घरों में रहे तो ममता ने एजूसैट की तर्ज पर अपने यू ट्यूब चैनल से बच्चों को पढ़ाने का काम किया है। उन्होंने अपने हैंड रिटन नोट्स चैनल पर डाले। चैनल से न केवल स्कूल व जिला के बल्कि पूरे प्रदेशभर के बच्चों ने सीखा।
इंजीनियरिंग के बेस का भी काम करती है स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब
स्कूल में स्थापित की गई अटल टिंकरिंग लैब छात्राओं के लिए एक तरह से इंजीनियरिंग के लिए बेस का काम कर रही है। यह जिला के सरकारी स्कूलों में एकमात्र लैब है, जो निजी स्कूलों को भी मात दे रही है। यहां पर छात्राओं द्वारा बिचली बचत पर आधारित ऐसा मॉडल तैयार किया गया है कि बच्चों के ट्रैक पर दौड?े से बिजली जनरेट होती है और टै्रक पर लगी लाईटे जल जाती हैं। इसी प्रकार से यहां पर थ्री-डी प्रिटर है, जिसमें छात्राएं स्केलटन, श्री गणेश की मूर्ति  व अंग्रेजी के अक्षरों आदि को बनाती हैं । इस लैब में फिलहाल स्कूल की 60 छात्राएं पढ़ रही हैं। यहां पर छात्राएं नए-नए डिजाईन बनाती हैं।
ममता के अनुसार बच्चों को किसी भी प्रश्न के बेसिक को समझना चाहिए फिर उसके फामूर्ले पर जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम बच्चों को खेल-खेल में बहुत कुछ सिखा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में जानने की जिज्ञासा पैदा करना है।
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