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Wild Life Crisis गर्मी की शुरुआत के साथ ही वन्य जीवों पर मंडराने लगा है संकट

वन्य जीवों के लिए नहीं है पानी की व्यवस्था, विभाग भी नहीं दे रहा ध्यान 

आज समाज डिजिटल, सतनाली:
Wild Life Crisis: राजस्थान की सीमा से सटे दक्षिण हरियाणा के रेतीले क्षेत्र सतनाली में गर्मी की शुरूआत हो चुकी है तथा गर्मी के शुरुआत के साथ ही सतनाली इलाके के वन्य जीवों पर खतरा मंडराने लगा है।(Wild Life Crisis) सतनाली इलाके की बात की जाए तो माधोगढ़, जेरपुर, मांडोला, नांगल माला सहित राजस्थान की सीमा के साथ लगती अरावली क्षेत्र में सघन वन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में वन्य जीवों की अनेक प्रजातियां है जो लुप्त होने की कगार पर है।

इन बेजुबानों पर आज तक नहीं गया विभाग का ध्यान

हैरत की बात तो यह है कि इन बेजुबानों पर तो आज तक न तो विभाग का ध्यान है और ही पंचायतें इस ओर कोई ठोस कदम उठा रही है। ऐसे में वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। मार्च माह के मध्य में ही गर्मी ने अपनी दस्तक दे दी थी तथा अब दिन प्रतिदिन तापमान में वृद्धि हो रही है परंतु न तो समाजसेवी संस्थाओं ने पक्षियों व वन्य जीवों के लिए पानी की व्यवस्था करने के प्रयास किए है न ही प्रशासन आगे आया है। ऐसे में बेजुबान वन्य जीवों के समक्ष पानी का संकट गहरा गया है।

राजस्थान से लगती है सतनाली क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों की सीमा 

ध्यान रहे कि सतनाली क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों की सीमा राजस्थान से लगती है। साथ ही इन गांवों की अधिकतर भूमि रेतीली है। वन्य जीवों की रक्षा के लिए गर्मी के दिनों में वन्य जीव विभाग की ओर से उनके पीने के पानी का भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। ऐसे में वन्य जीव गर्मी के मौसम में पीने के पानी की तलाश में आबादी क्षेत्र में आ जाते है। आबादी क्षेत्र में आने के कारण या तो वे खुद आवारा कुत्तो के शिकार हो जाते है या फिर वे लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर देते है।
गर्मी के मौसम को देखते हुए वन्य जीव विभाग द्वारा वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए है। क्षेत्र के लोगों ने सरकार व विभाग से मांग की है कि प्राकृतिक तालाबों के जरिए या अन्य कोई प्रबंध करके वन्य प्राणियों के पीने के पानी की व्यवस्था की जाए ताकि वन्य प्राणियों का जीवन भी संरक्षित हो सके तथा वे आबादी क्षेत्र में न आ सके। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही वन्य प्राणियों के संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो अनेक दुर्लभ प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी।
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