Kisan Bachao Padyatra Latest News: पंजाब के हजारों किसान प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेल डील का विरोध कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर रविवार को किसान दिल्ली कूच कर रहे थे, लेकिन उन्हें हरियाणा बॉर्डर पर ही रोक लिया गया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले शुरू हुई ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ को हरियाणा में प्रवेश करने से रोकने के लिए पुलिस ने खनौरी बॉर्डर को सील कर दिया है। हरियाणा पुलिस ने बॉर्डर पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की है और किसानों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। किसानों का यह मार्च पंजाब के डाटा सिंह वाला से शुरू होकर करीब 228 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचना था। किसान संगठनों का कहना है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है। वहीं, हरियाणा पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए अनुमति नहीं ली गई है। इसी वजह से किसानों को हरियाणा में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।
खनौरी बॉर्डर पर क्या हुआ?
रविवार को पंजाब की तरफ बड़ी संख्या में किसान और समर्थक खनौरी-डाटा सिंह वाला बॉर्डर पर पहुंचे। किसानों को हरियाणा के रास्ते दिल्ली की ओर आगे बढ़ना था। हरियाणा पुलिस ने पहले ही बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। कंक्रीट बैरिकेड, लोहे के अवरोध, कंटीले तार और पुलिस के दंगा-रोधी वाहन तैनात किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक बॉर्डर पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस ने किसानों को हरियाणा में प्रवेश करने से रोक दिया। इसके बाद किसान नेताओं ने बॉर्डर के पंजाब वाले हिस्से में ही शांतिपूर्ण तरीके से बैठने का फैसला किया।
228 किमी की है पदयात्रा
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ का ऐलान किया था। यह यात्रा पंजाब के डाटा सिंह वाला से शुरू होकर करीब 228 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर तक जानी थी। किसान नेताओं के कार्यक्रम के मुताबिक पदयात्रा 29 अगस्त को दिल्ली में किसान पंचायत के साथ समाप्त होनी थी। शुरुआती चरण में 51 किसानों के शामिल होने की बात कही गई थी। इसके अलावा करीब 200 स्वयंसेवकों और समर्थकों के भी साथ रहने की जानकारी दी गई।
किसानों की क्या मांगें हैं?
इस पदयात्रा के पीछे किसानों की कई मांगें हैं। सबसे प्रमुख मुद्दों में फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानूनी गारंटी शामिल है। इसके अलावा किसान संगठन प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी विरोध कर रहे हैं। किसान नेताओं को आशंका है कि व्यापार समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात का असर भारतीय किसानों पर पड़ सकता है। इस आंदोलन का मुद्दा केवल दिल्ली तक मार्च करने का नहीं है। किसान संगठन अपनी कृषि संबंधी मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं।
सरकार से बातचीत हुई विफल
किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद किसान नेताओं और हरियाणा सरकार के अधिकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत हुई। हालांकि इन बैठकों में कोई सहमति नहीं बन सकी। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ बैठक के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने मुख्य मुद्दों पर बातचीत के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बैठक की मांग रखी। बातचीत विफल रहने के बाद किसानों ने बॉर्डर पर ही शांतिपूर्ण तरीके से बैठने का फैसला किया।
अब किसानों का क्या प्लान है?
हरियाणा पुलिस द्वारा रास्ता बंद किए जाने के बाद किसान पंजाब की तरफ ही रुक गए हैं। किसान नेता डल्लेवाल ने कहा कि वे बॉर्डर पर शांतिपूर्ण तरीके से बैठेंगे। खनौरी बॉर्डर सील किए जाने का असर दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले वाहनों पर भी पड़ा है। पुलिस ने ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों की ओर डायवर्ट किया है। इसलिए पंजाब और हरियाणा के बीच इस रास्ते से यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय ट्रैफिक एडवाइजरी देखकर ही सफर करने की सलाह दी गई है।


