Homeहरियाणाकरनालरिकॉर्ड बुआई से होगी गेहूं की बंपर पैदावार

रिकॉर्ड बुआई से होगी गेहूं की बंपर पैदावार

इशिका ठाकुर,करनाल:
रिकॉर्ड बुआई से होगी गेहूं की बंपर पैदावार, राष्ट्रीय गेहूं एवं जो संस्थान करनाल ने 112 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का रखा लक्ष्य , देश के किसानों ने जताया संस्थान की जलवायु एवं बीमारी रोधी नई किस्मों पर विश्वाश , संस्थान द्वारा विकसित मशीन से हर तरह के फसल अवशेष का हो सकेगा प्रबंधन।

गेहूं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ ज्ञानेंद्र सिंह

Record sowing will result in bumper yield of wheat
Record sowing will result in bumper yield of wheat

देश में 2023 में गेहूं की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है क्योंकि नमी की भरपाई से इस बार किसानों ने ज्यादा क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की है। पिछले साल अधिक गर्मी के कारण गेहूं के उत्पादन में थोड़ी कमी दर्ज की गई थी। गेहूं का ज्यादा उत्पादन विश्व के दूसरे नंबर के गेहूं उत्पादक देश भारत के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है, जिसके चलते मई में लगे गेहूं निर्यात को खोलने पर भी सरकार विचार कर सकती है। इसके साथ ही उच्च खुदरा महंगाई पर चिंताओं को कम करने में भी मदद मिलेगी। करनाल स्थित राष्ट्रीय गेहूं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि इस बार गेहूं का उत्पादन क्षेत्र पंजाब हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी बढ़ा है।

नई किस्मों को इस बार 70% से अधिक किसानों ने अपनाया

Record sowing will result in bumper yield of wheat
Record sowing will result in bumper yield of wheat

उच्च तकनीक के चलते देश के बंजर इलाकों में भी गेहूं उत्पादन के आसार बने हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार के मुकाबले इस बार 31. 5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई होने जा रही है। यह पिछले साल के मुकाबले डेड मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र अधिक है। इसके कारण इस वर्ष हम 112 मिलियन गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इस बार मौसम को देखते हुए जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं हम यह लक्ष्य हासिल कर लेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार बीमारी की संभावना भी बहुत कम है। डॉ ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान द्वारा विकसित नई किस्मों को इस बार 70% से अधिक किसानों ने अपनाया है जो जलवायु प्रतिरोधी और बीमारी रहित हैं। उन्होंने कहा कि इस बार मध्यप्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ में गेहूं का रकबा बढ़ा है।

संस्थान के निदेशक डॉ ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि उनके संस्थान ने एक ऐसी रोटरी ड्रिल मशीन विकसित की है जो हर तरह के अनाज अवशेष को खेत में ही मिला देता है और इसके साथ हम सीधी बिजाई कर काफी बचत कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से पर्यावरण भी बचेगा साथ ही खेत को खाद भी मिलेगी, यह मशीन 24 घंटे और सातों दिन काम कर सकती है।

ये भी पढ़ें :रेडक्रॉस भवन में मनाया विश्व एड्स दिवस

ये भी पढ़ें : मंगल सैन आडीटोरियम में आयोजित नूरानी सिस्टर्स के कार्यक्रम में कलाकारों ने बनाई अपनी जगह

ये भी पढ़ें : करनाल रोडवेज डिपो के 2 रूट पर हुई ई टिकटिंग शुरू

SHARE
RELATED ARTICLES

Most Popular