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जेइइ-मेंस में जेनिसिस क्लासिस के बच्चों ने फहराया सफलता का परचम

जेइइ-मेंस फाईनल रिजल्ट में समर्पण 137वां और प्रभात यादव ने 217वां आॅल इंडिया रेंक प्राप्त किया
जेनिसिस के 6 बच्चों ने पाया 10 हजार रेंक में स्थान

प्रवीण वालिया, करनाल:

देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए एनटीए द्वारा ली जाने वाली जेइइ-मेंस का फाईनल परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। जिसमें बच्चों की आॅल इंडिया रेंक घोषित की गई। उत्तर भारत के जाने-माने शिक्षण संस्थान जेनिसिस क्लासिस के विद्यार्थियों ने सफलता का कीर्तिमान स्थापित किया। इस संस्थान के समर्पण ने देशभर में 137वां रेंक प्राप्त किया। प्रभात कुमार यादव ने 217वां रेंक, आर्यन दहिया ने 736वां रेंक प्राप्त किया। जेनिसिस क्लासिस पिछले 14 सालों से मेडिकल, इंजीनियरिंग, केवीपीवाई, एनडीए, एनटीसी सहित विभिन्न प्रतियोगी परिक्षाओं में सफलता का पर्याय बनी हुई है। इसी सफलता के मूल-मंत्र का बरकार रखते हए। जेनिसिस क्लासिस के 28 बच्चों ने 16 हजार रेंक के अंतर्गत स्थान प्राप्त किया। जानकारी देते हुए जेनिसिस क्लासिस के डायरेक्टर जितेंद्र अहलावत व नवनीत कल्हण ने बताया कि इस बार फिर 100 से अधिक बच्चों ने जेइइ-एडवांस के लिए क्वालिफाई किया। जेनिसिस के समर्पण वर्मा ने 137वां रेंक , प्रभात कुमार यादव ने 217वां रेंक , कुंज सैनी ने 311वा रेंक, आर्यन दहिया ने 736वां रेंक, अंश चौधरी ने 1028वां रेंक, विशाखा चौधरी ने 2094वा रेंक, भवदीप सिंह ने 2534वां रेंक, रूप नंदिनी ने 2875वा रेंक, दिग्विजय ने 6128 वां रेंक, अंश चौधरी ने 7994वा रेंक, प्रांशुल पाहवा ने 8900वां रेंक, अमिताभ कुमार ने 11140वा रेंक, दुष्यंत बत्तरा ने 11635वां रेंक, अभय ने 12136वा रेंक, मानवी भूटानी ने 14611वा रेंक प्राप्त की।

सपर्पण वर्मा ने फिजिक्स में अर्जित की 100 परसेंटाईल

जेनिसिस क्लासिस के बच्चों को अभूतपूर्व सफलता का उत्सव मनाया गया। इस मौके पर सफल विद्यार्थियों का टीचर द्वारा मुंह मीठा करवाया गया। इस बार परीक्षा परिणाम में जेनिसिस की टीम की मेहनत और समपर्ण का असर दिखाई दिया। जानकारी देते हुए जेनिसिस क्लासिस के डायरेक्टर जितेंद्र सिंह अहलावत और नवनीत कल्हण ने बताया कि प्रतिकुल परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन किया। पिछले 14 सालों से जेनिसिस क्लासिस विद्यार्थियों और अभिभावकों के सपने पूरे करने के लिए लगातार परिश्रम कर रही है। इस अवधि में इस संस्थान ने शहर को एम्स, आईआईटी, एनआईटी और देश जाने-माने मेडिकल कॉलेजों में विद्यार्थियों के प्रवेश के सपने को पूरा किया। इस संस्थान के सैकड़ों विद्यार्थियों ने इन प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए सफलता अर्जित की। आज इस सस्थान के विद्यार्थी माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे सस्थानों में बेहतर और प्रतिष्ठित पैकेज ले रहे।

छोटे से गांव से निकला समर्पण बनना चाहता है कम्प्यूटर इंजीनियिर

प्रतिभा ग्रामीण और शहरी माहोल का मोहताज नहीं होती। यूपी के सिदूर क्षेत्र से सीतापूर से किसान के बेटे ने करनाल के जेनिसिस में आकर सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया। समर्पण ने आॅल इंडिया 137वां रेंक प्राप्त की। फिजिक्स में समपर्ण ने 100 परसेंटाइल प्राप्त की। सीतापूर से कुरुक्षेत्र गुरूकुल में आकर तैयारी कर इस बार उसने अच्छे अंक प्राप्त किए। वह कम्प्यूटर इंजीनियर बनाना चाहता है। उसके पिता सीतापूर में छोटे से किसान संतोष कुमार का सपना बेटें को इंजीनियर बनाना था। समर्पण के भाई भी इस साल नीट की दी है और एनटीए द्वारा जारी की गई उत्तर कुंजी के अनुसार 646 अंक बन रहे है। समर्पण ने अपनी सफलता का श्रेय कुरुक्षेत्र गुरूकुल के माहोल और जेनिसिस क्लासिस के टीचर्स के लगातार संपर्क, कुशल मार्गदर्शन और बड़ी जटिल से जटिल प्रश्नों का समाधान निकालने को देता है। उसका कहना था कि वह इतनी दूर से जेनिसिस में इसलिए पढ़ने आया कि यहां उसे घर जैसा माहोल मिला। यूपी के मिजार्पूर से जेनिसिस में आकर सफलता का स्वाद चखने वाले प्रभात को भी यहां नई मंजिल मिली। प्रभात ने आॅल इंडिया 217वां रेंक प्राप्त की। इनका परिवार व्यवसायी है और माता घरेलु महिला है। उसका एक भाई बीएचयू में आईआईटी कर रहा है। इतनी दूर से जेनिसिस में आकर प्रभात अपने आपको भाग्यशाली मानता है। उसने बताया कि उसे जेनिसिस क्लासिस में उसे परिवार जैसा माहौल मिला। यहां टीचर्स से उसे हर मुश्किल से लड़ने लायक बनाया। वह कम्प्यूटर इंजीनियर बनाना चाहता है।

जेनिसिस में अध्ययन कर अंश चौधरी ने आॅल इंडिया रेंक प्राप्त किया 1028वा

यूपी के मुज्जफरनगर से जेनिसिस में अध्ययन कर अंश चौधरी ने आॅल इंडिया 1028वा रेंक प्राप्त किया। वह ऐयरो स्पेश टॅक्नोलॉजी में बी-टेक करना चाहता है। उसकी इच्छा अंतरिक्ष यात्री बनने की है। किसान का बेटा अंश चौधरी भी जेनिसिस की सफलता की कहानिया सुनकर यहां पर आया। उसके पिता छोटे से किसान है। संदीप चौधरी ने अपने बेटे को इंजीनियर बनाने के लिए यहां भेजा। अब उसका अगला टॉरगेट जेइइ-एडवांस परीक्षा है। उसे भरोसा है कि वह निििश्चत की अच्दे अंक प्राप्त करेगा। रोहतक से करनाल जेनिसिस में आए आर्यन दहिया का सपना भी पूरा होने की कगार पर है। आर्यन ने जेइइ-मेंस परीक्षा में आॅल इंडिया 736वां रेंक प्राप्त किया। वह कम्प्यूटर इंजीनियिर बनाना चाहता है। उसके पिता रेलवे पूलिस में काम करते है। उसने बताया कि जेनिसिस में उसे सफलता को प्राप्त करने का मुलमंत्र दिया। वह आज जेनिसिस के अध्यापकों का आभारी है। जिन्होंने उसे मेहनत करना सिखाया है। उसने कहा कि अब वह एडवांस परीक्षा के लिए पूरजोर तैयारी करेगा। भवदीप ने आॅल इंडिया स्तर पर 2534वां रेंक प्राप्त कर अपने परिवार का नाम रोशन किया है। भवदीप कम्प्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है। उसका पसंदीदा स्थान आईआईटी दिल्ली है। उसको बड़ी बहन से प्रेरणा मिली। जिसने कम्प्यूटर सांईस में ही इंजीनयिरिंग की। भवदीप के पिता मनमोहन सिंह बैंक मैनेजर है तथा माता अध्यापिका है। भवदीप ने बताया कि उसे जेनिसिस क्लासिस में सफलता का रास्ता मिला। जिस पर चलकर वह इस मंजिल तक पहुंचा। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और अध्यापकों के बेहतर मार्गदर्शन को दिया। उसने बताया कि वह एडवांस की जीतोड़ तैयारी करेगा और अपनी सफलता को बरकरार रखेगा।

 

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