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असंध क्षेत्र के गांव बंदराला व दनौली के किसानों द्वारा समझाने-बुझाने के बावजूद भी टावर लगाने के कार्य को रोकने का प्रयास

इशिका ठाकुर,असंध/करनाल:

फसल अवशेष प्रबंधन के तहत किसानों की आमदनी बढ़ाने तथा पराली जलाने की समस्या के समाधान को लेकर पानीपत रिफाइनरी में एथेनॉल प्लांट लगाया जा रहा है, 220 केवी मंूड सब स्टेशन से पानीपत रिफाइनरी एथेनॉल प्लांट तक लाईन के लिए करीब 135 टावर लगाए जाने प्रस्तावित है। इनमें से हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम द्वारा अब 117 टावर लगाए जा चुके है और इनमें से 100 टावरों का संंबंधित किसानों को करीब 70 लाख रूपये की रााशि का मुआवजा मिल चुका है, शेष 17 टावरों से संबंधी किसानों को मुआवजा राशि एक सप्ताह के अंदर मुहैया करवाई जाएगी। केवल बंदराला व दनौली के गांव में 16 टावर का कार्य पिछले एक साल से रूका हुआ है। प्रशासन की ओर से संबंधित किसानों को सरकार की पोलिसी के बारे में पूरी तरह अवगत करवाया गया है और उन्हें कार्य में रूकावट ना डालने बारे में बार-बार अनुरोध किया जा रहा है।

सरकार की मुआवजा पोलिसी के बारे दी जानकारी 

Efforts to stop the work of installation of towers even after persuasion by the farmers

यह जानकारी हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के कार्यकारी अभियंता रणदीप सिंह चौहान ने दी। उन्होंने बताया कि असंध क्षेत्र के गांव बंदराला व दनौली के किसानों द्वारा समझाने-बुझाने के बावजूद भी टावर लगाने के कार्य को रोकने का प्रयास किया गया है। इसके बावजूद भी प्रशासन की ओर से स्वयं उपायुक्त अनीश यादव द्वारा किसानों से सहानुभूतिपूर्वक बातचीत की और उनको सरकार की मुआवजा पोलिसी के बारे में जानकारी दी गई है। फसल अवशेष प्रबंधन के तहत पानीपत रिफाइनरी में लगाये जा रहे एथेनॉल प्लांट से किसानों की बढ़ेगी आमदनी, पराली जलाने की समस्या का होगा स्थाई समाधान, प्रदूषण पर लगेगी रोक।

एथेनॉल प्लांट से बढ़ेगी किसानों की आमदनी 

डीसी अनीश यादव ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि पानीपत रिफाइनरी में एथेनॉल का जो प्लांट लगाया जा रहा है, इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इस प्लांट के लगने से किसानों को पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि उन्हें पराली खेत से उठाने की कीमत की अदायगी कम्पनी द्वारा की जाएगी। इससे ना केवल पराली जलाने से होने वाले पर्यावरण के नुकसान से बचा जा सकता है, वहीं किसानों की आमदनी में बढ़ौतरी होगी। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म होती है बल्कि मित्र कीड़े भी नष्ट होते है और फसल उत्पादन भी कम होता है। इतना ही नहीं पर्यावरण दूषित होने से प्राणियों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है।
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