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हुड्डा खेमे के उदयभान को कांग्रेस की कमान, चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए, शैलजा का इस्तीफा

आज समाज डिजिटल, अंबाला:
अर्से से हरियाणा कांग्रेस में चली आ रही खींचतान कुछ हद तक थम गई है। जद्दोजहद के बाद हरियाणा कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। हाईकमान ने पूर्व विधायक उदयभान को हरियाणा में पार्टी की कमान सौंपी है। वहीं चार नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किया है। उदयभान का रिश्ता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गुट से रहा है।

राजनीतिक सफर

पहली बार लोक दल बहुगुणा से हसनपुर से विधायक बने। (अब इसी सीट को होडल सीट के नाम से जाना जाता है)
1990 में कृभको के चैयरमैन बने
पुनः 2000 में निर्दलीय विधायक बने
2005 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने
2014 में पुनः कांग्रेस के विधायक बने

सैलजा का इस्तीफा स्वीकार

हुड्डा गुट लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष अपने खेमे के नेता को बनाने की मांग कर रहा था। आखिरकार बुधवार को उनकी यह मांग पूरी हुई। पिछले सप्ताह ही कुमारी सैलजा ने सोनिया गांधी से मुलाकात कर प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दिया था। सोनिया गांधी ने सैलजा के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है।

कार्यकारी अध्यक्ष बनाने में जातीय समीकरण

हुड्डा खेमे के उदयभान को कांग्रेस की कमान, चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए, शैलजा का इस्तीफा
हुड्डा खेमे के उदयभान को कांग्रेस की कमान, चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए, शैलजा का इस्तीफा

पार्टी ने श्रुति चौधरी, रामकिशन गुर्जर, जितेंद्र भारद्वाज और सुरेश गुप्ता को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में जातीय समीकरण का ध्यान रखा। अनुसूचित जाति के अध्यक्ष को हटाकर उसी जाति के उदयभान को कमान सौंपी गई है। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष उदयभान के पिता गया राम विधायक रह चुके हैं।

सैलजा पर हावी रही हुड्डा की मोर्चाबंदी
हुड्डा खेमे के उदयभान को कांग्रेस की कमान, चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए, शैलजा का इस्तीफा
हुड्डा खेमे के उदयभान को कांग्रेस की कमान, चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए, शैलजा का इस्तीफा

भूपेंद्र हुड्डा के सामने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा की नहीं चली। वह प्रदेश में संगठन नहीं खड़ा कर सकीं। इससे पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर और हुड्डा खेमे के बीच विवाद जगजाहिर है। तंवर भी प्रदेश में अपना संगठन खड़ा नहीं कर सके थे। हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को ही अलविदा कह दिया। तंवर के बाद पार्टी ने कुमारी सैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। मगर हालात तब भी नहीं बदले। हुड्डा और सैलजा गुट के बीच खींचतान जारी रही।

कुलदीप बिश्नोई भी थे दावेदार

कुलदीप बिश्नोई ने भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद पर दावेदारी जताई थी। क्योंकि उनका कहना था कि यदि हुड्डा परिवार के पास दोनों पद चले गए तो बाकी गुट नाराज हो जाएंगे। पार्टी हाइकमान पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को ही प्रदेशाध्यक्ष पद सौंपने के लिए तैयार हो गया था, परंतु भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समक्ष नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ने की शर्त हाईकमान ने रखी थी।

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