Haryana Bank Scam: क्या है हरियाणा का आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला? सैकड़ों करोड़ के सरकारी फंड का हुआ गबन, कई आईएएस अफसर भी शामिल

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Haryana IDFC Bank Scam
हरियाणा आईडीएफसी बैंक घोटाला

Haryana IDFC Bank Scam News: हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. अब सीबीआई ने इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा किया है. सीबीआई का दावा है कि सरकारी विभागों से निकाली गई 329 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि फर्जी कंपनियों के जरिए चंडीगढ़ के एक ज्वेलर तक पहुंचाई गई. यहां फर्जी सोने के कारोबार का दिखावा कर रकम को नकदी में बदला गया और फिर इसे साजिशकर्ताओं के बीच बांटा गया.

सीबीआई के अनुसार घोटाले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों के साथ कई आईएएस अफसर भी शामिल हैं. इन सभी ने मिलकर हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों के सरकारी फंड का गबन किया.

रिभव ऋषि पूरे नेटवर्क का था मास्टरमाइंड

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का पूर्व ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था. सीबीआई के अनुसार एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जाने के बाद भी उसने इसी तरीके से सरकारी फंड की हेराफेरी जारी रखी. सरकारी धन को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स, एसआरआर प्लानिंग गुरुस, विस्टामेड सॉल्यूशंस और मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर जैसी कथित फर्जी कंपनियों के खातों में भेजा गया.

जांच में सामने आया कि चंडीगढ़ सेक्टर-35 स्थित सावन ज्वैलर्स के मालिक राजन सिंह कटोदिया को नवंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच 329.57 करोड़ रुपये मिले. इसमें से कैपको फिनटेक सर्विसेज से करीब 138 करोड़ रुपये, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से 131 करोड़ रुपये, आरएस ट्रेडर्स से करीब 45 करोड़ रुपये, फर्जी बिल, सोना बाजार में बेचा, फिर कैश पहुंचाया.

सोना खरीद फर्जी कंपनियों के नाम पर बिल बनाए

सीबीआई के मुताबिक ज्वेलर ने सप्लायरों से सोना खरीदकर फर्जी कंपनियों के नाम पर बिल बनाए ताकि लेन-देन वैध दिखाई दे. लेकिन, सोना फर्जी कंपनियों को देने की बजाय खुले बाजार में बेच दिया गया. इससे मिली नकदी कथित तौर पर रिभव ऋषि और उसके सहयोगियों तक पहुंचाई गई.

सीबीआई ने रिभव ऋषि के कर्मचारियों राहुल, मनीष और अमृतपाल के बयान दर्ज किए हैं. सीबीआई का दावा है कि ये कर्मचारी नियमित रूप से ज्वेलर के यहां से बड़ी मात्रा में नकदी लेकर जाते थे. ज्वेलर के एक कर्मचारी ने भी कथित तौर पर बताया कि उसने बुलियन कारोबारियों और सप्लायरों से 155 करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी जुटाकर ऋषि के लोगों को सौंपी.

होटल लैंडमार्क के मालिक विक्रम वधवा का भी आया नाम

सीबीआई की जांच में फर्जी GST इनवॉइस के जरिए लेन-देन को वैध दिखाने के भी आरोप लगाए गए हैं. दैनिक भास्कर के मुताबिक जांच में चंडीगढ़ के रियल एस्टेट कारोबारी और होटल लैंडमार्क के मालिक विक्रम वधवा का नाम भी सामने आया है.

सीबीआई का आरोप है कि वधवा ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से संपर्क बनाए और सरकारी लेन-देन में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को प्राथमिकता दिलाने का प्रयास किया. फिलहाल आगे की जांच जारी है.

क्या है आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला?

हरियाणा सरकार के लगभग 18 विभागों ने एफडी में निवेश करने के लिए आईडीएफसी बैंक में करीब 590 करोड़ रुपये जमा कराए थे. इसके बाद नियमों को अनदेखा कर चंडीगढ़ ब्रांच में खाते खोले गए. बैंक के कर्मियों ने जाली चेक, जाली भुगतान निर्देशों और आईएएस अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग करके इस पैसे को कई फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में अनधिकृत रूप से ट्रांसफर कर दिया.

इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करके पैसे दूसरे बैंक में भेजने का अनुरोध किया.

घोटाले का खुलासा होते ही विभागों में हड़कंप मच गया. इसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को दी गई. फिर बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथ में सौंप दिया गया. प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है. इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.