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रोहतक : किसानों से बात कर तीनों काले कानून वापिस ले सरकार सर्व कर्मचारी संघ

संजीव कुमार, रोहतक :
आज सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से संबंधित सभी विभागीय नियमों द्वारा स्थानीय मानसरोवर पार्क में एकत्रित होकर प्रदर्शन करते हुए। उपायुक्त महोदय के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं देश के प्रधानमंत्री के नाम कर्मचारी विरोधी किसान विरोधी एवं जनता विरोधी निजीकरण की नीतियों और तीनों काले कानूनों के खिलाफ ज्ञापन देने का कार्य किया। प्रदर्शन एवं ज्ञापन की प्रक्रिया की अध्यक्षता जिला प्रधान कर्मवीर सिवाच एवं ब्लॉक प्रधान सतवीर मंडल द्वारा संयुक्त रूप से की गई। संचालन जिला सचिव जयकुॅवार दहिया द्वारा किया गया। प्रदर्शन में मुख्य रूप से महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक के राज्य प्रधान रणधीर कटारिया, पीडब्ल्यूडी बी एंड आर रजिस्टर नंबर 41 से राजेश लाकड़ा ,शिवकुमार ,बिजली बोर्ड से धर्मराज कुंडू ,विकास दहिया, हरियाणा रोडवेज से हिम्मत राणा ,रणबीर दहिया, पटवारी कानूनगो एसोसिएशन से जयबीर चहल ,स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी यूनियन से कुलदीप सिंह, हुड्डा विभाग से प्रेम घिलौंडिया, राजेन्द्र लौहट, हरियाणा टूरिज्म से जोगेंद्र दलाल, रामकरण पूनिया आदि। नेताओं ने अपने विचार रखे एवं सरकार से मांग की कि सरकार तुरंत प्रभाव से कर्मचारियों के मांग मुद्दों पर बात करते हुए। लगभग 11 महीने से धरने पर बैठे किसानों से बात करके समस्या का समाधान निकालें अन्यथा आने वाले समय में कर्मचारी मजदूर श्रमिक छात्र नौजवान युवा महिला एवं आम जनता का हिस्सा एक मंच पर एकत्रित होकर बड़े से बड़े आंदोलन की घोषणा करके सड़कों पर उतरने का काम करेगा जिस में होने वाली क्षतिपूर्ति का संगम प्रशासन जिम्मेदार होगा। कर्मचारियों की मांग मुद्दे किस प्रकार से हैं।
1.शिक्षा स्वास्थ्य बिजली पानी जन स्वास्थ एवं परिवहन सेवाओं के निजीकरण पर पूर्ण रोक लगाई जाए ।
2.तीनों असंवैधानिक कृषि कानूनों वह चारों लेबर कोर्ट को रद्द किया जाए ।
3.बिजली संशोधन बिल व ट्रांसपोर्ट रोड सेटी बिल रद्द किया जाए ।
4.राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूर्णता रद्द किया जाए।
5.हरियाणा में बनाया गया संपत्ति क्षति पूर्ति विधेयक बिल रद्द किया जाए।
6.पीएफआरडीए को खत्म कर पुरानी पेंशन बहाल की जाए ।
7.जन सेवाओं के मौका विस्तार कर पद सृजित करते हुए पहले से काम कर रहे कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के बाद नियमित भर्ती कर बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए।
8. राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन नीति को रद्द किया जाए।

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