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करनाल: ग्रामीण अंचल में ही राजकीय कॉलेजों में मिल रही हैं शहर जैसी सुविधाएं : प्राचार्य डा. पीयूष कुमार

प्रवीण वालिया,घरौंडा/करनाल:
राजकीय महिला महाविद्यालय बसताड़ा में मंगलवार को वर्ष 2021-22 के लिए छात्राओं के प्रवेश में वृद्घि के निमित्त प्रैस कांफ्रैंस आयोजित की गई। इसमें पंडित चिरंजी लाल राजकीय महाविद्यालय करनाल की पूर्व प्राचार्या रेखा शर्मा तथा जिले के महाविद्यालयों के वर्तमान प्राचार्यों द्वारा अपने अनुभवों को सांझा करते हुए हरियाणा सरकार द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्य को साकार करने के प्रयासों की सराहना की गई।
कॉलेज के प्रचार्य डा. पीयूष कुमार ने बताया कि जिले में कुल 10 राजकीय महाविद्याल हैं जोकि देश के किसी भी जिले में सर्वाधिक तथा किसी भी गैर सरकारी महाविद्यालय की तुलना में सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त हैं। इनमें कला, वाणिज्य तथा विज्ञान (मेडिकल-नॉन मेडिकल) के अतिरिक्त बैचलर इन कम्पयूटर एप्लीकेशन, बीएससी, ऑनर्स इन इन्फोर्मेशन टैक्रोलॉजी, बीएससी इन होम साईंस, बीटीएम, बीबीए, बीए ऑनर्स, इन इंग्लिश आदि विभिन्न विषयों में प्रवेश लेने के लिए सम्पूर्ण जिले की कुल 9848 सीटों का 56.64 अर्थात 4890 सीटें उपलब्ध हैं। राजकीय महाविद्यालयों की फीस भी प्राईवेट तथा सेल्फ फाईनेंस्ड कॉलेजों की तुलना में दस गुणा कम है। ग्रामीण आंचल की बालिकाओं एवं महिलाओं के उच्च अध्ययन विषयक माता-पिता की सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंता का निराकरण कर उक्त दस राजकीय महाविद्यालयों में से सात महिलाओं के लिए तथा इन सात में से छ: विशिष्टïत: ग्रामीण अंचल में ही खोलकर हर दस किलोमीटर पर बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए निश्चिंत और निर्भय होकर उच्च शिक्षा ग्रहण की आकांक्षा को फलीभूत करने के निमित्त आधारभूमि प्रदान की है।
उन्होंने बताया कि राजकीय महाविद्यालय में कार्यरत शिक्षक उच्च शिक्षित एवं सर्वथा योग्य तथा कक्षा कक्ष भी खुले और हवादार होते हैं। छात्राओं के लिए घर से महाविद्यालय तक आने-जाने की नि:शुल्क बस सुविधा, निशुल्क पासपोर्ट के अतिरिक्त जरूरतमंद निर्धन मेधावी छात्र-छात्राओं की वित्तीय सहातार्थ अर्न वाईल लर्न स्कीम तथा ड्राईविंग लाईसेंस बनाने की सुविधा भी राजकीय महाविद्यालयों में उपलब्ध है। अब यह छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को इनमें प्रवेश दिलाकर सरकार के प्रयासों को सार्थकता प्रदान करें और सुनिश्चित करें कि उनके आस पड़ोस के सभी उच्च शिक्षाकांक्षी प्रवेश ग्रहण करें और किसी भी राजकीय महाविद्यालय में एक भी सीट रिक्त न रहने पाए। इस अवसर पर असंध, जुंडला, घरौंडा, पाढा, मटक माजरी, बसतली, तरावड़ी इत्यादि राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने सक्रिय भाग लेते हुए मीडिया के माध्यम से अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को शहर की बजाए अपने ग्रामीण अंचल में स्थित राजकीय महाविद्यालयों में प्रवेश अवश्य दिलाएं।
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