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भारत और स्वीडन स्मार्ट और टिकाऊ विमानन प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर सहमत

आज समाज डिजिटल,नई दिल्ली:
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और स्वीडन की एलएफवी एयर नेविगेशन सर्विसेज (एलयूएफटीएफएआरटीएसवीईआरकेईटी) ने 25 अगस्त, 2022 को नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी भवन में एएआई कार्यालय में एक सहमति करार पर हस्ताक्षर किए। सहमति करार पर एम सुरेश, सदस्य (एयर नेविगेशन सर्विसेज), एएआई और मैग्नस कोरेल, उप महानिदेशक, एलएफवी स्वीडन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर मालिन सेडरफेल्ड ओस्टबर्ग, राज्य सचिव, इन्फ्रास्ट्रक्चर मंत्रालय, स्वीडन सरकार, रुबीना अली, संयुक्त सचिव, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार, एच.ई क्लास मोलिन, भारत में स्वीडन के राजदूत और एच.ई. तन्मय लाल, स्वीडन में भारत के राजदूत मौजूद थे। गणमान्य लोगों के अतिरिक्त कार्यक्रम में एएआई, एलएफवी, स्वीडन दूतावास, नई दिल्ली और बिजनेस स्वीडन – स्वीडिश ट्रेड एंड इन्वेस्ट काउंसिल के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी देखी गई।

कई भागीदार इस करार के तहत एकजुट होंगे

दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में एक भारतीय विमानन क्षेत्र के कई भागीदार इस करार के तहत एकजुट होंगे और नेक्स्ट-जेन सस्टेनेबल विमानन प्रौद्योगिकी के विकास और संचालन में प्रमाणिक क्षमताओं के साथ स्वीडन के सहयोग से विमानन के स्मार्ट सॉल्यूशन की खोज करेंगे। नेक्सट-जेन स्मार्ट एयरपोर्ट और सस्टेनेबल परिवहन व्यवस्था का तेजी से विकास आज समय की मांग है जिसे पूरा करने के लक्ष्य से दोनों पक्षों ने कथित करार के निम्नलिखित पहलुओं पर सहमति व्यक्त की है भारत और स्वीडन के बीच दीर्घकालिक सहयोग के बारे में बात करते हुए भारत में स्वीडन के राजदूत क्लास मोलिन ने कहा, ‘‘पहले से जारी भारत-स्वीडन सहयोग के अतिरिक्त नए करार से हमें बहुत उम्मीद है। सस्टेनेबलिटी, स्वास्थ्य, इनोवेशन, ऊर्जा पहले से हमारे करार में शामिल हैं और अब इसका विस्तार नागरिक उड्डयन क्षेत्र में होगा। मैं इस एमओयू से स्वीडन और भारत विमानन क्षेत्र में क्लाइमेट-स्मार्ट सॉल्यूशन विकसित करने के अधिक अवसर मिलेंगे इससे उत्साहित हूं। ”

भारत-स्वीडन साझेदारी नई ऊंचाई छू रही

स्वीडन में भारत के राजदूत तन्मय लाल ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘भारत-स्वीडन साझेदारी नई ऊंचाई छू रही है। इस करार से एक अन्य महत्वपूर्ण उद्यम जुड़ेगा और यह करार विमानन क्षेत्र में सुरक्षा, सस्टेनबलिटी और सक्षमता बढ़ाने के लिए अवश्यक प्रौद्योगिकी सहयोग की सुविधा देगा। भारत के कोने-कोने को जोड़ते क्षेत्रीय विमान सेवा के मद्देनजर इस करार का महत्व और बढ़ जाता है।’’
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