Homeराज्यचण्डीगढ़झज्जर में 5 एकड़ भूमि पर ‘लाडो की बगिया’ आक्सीवन का वर्चुअल...

झज्जर में 5 एकड़ भूमि पर ‘लाडो की बगिया’ आक्सीवन का वर्चुअल शुभारंभ

-बेटियों को कोख में मत मारो, क्या पता कोख में बेटी नहीं, मेडल पल रहा हो : मुख्यमंत्री
आज समाज डिजिटल, चंडीगढ़:
प्रदेशभर में लगाए जा रहे आॅक्सीवन की श्रृंखला में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को हरियाली तीज के अवसर पर झज्जर के गांव खानपुर खुर्द में 5 एकड़ भूमि पर ‘लाडो की बगिया’ आॅक्सीवन का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर करीब 500 बेटियों ने 500 पौधे लगाए, जिनकी देखभाल करने का कार्य भी वे स्वयं करेंगी।
मुख्यमंत्री ने तीज की बधाई देते हुए कहा कि तीज का पर्व हरियाली और खुशहाली लेकर आता है। उन्होंने तीज के अवसर पर बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बेटियों को कोख में मत मारो, क्या पता कोख में बेटी नहीं, मेडल पल रहा हो।
उन्होंने कहा कि पेड़ हमारे ‘प्राण वायु देवता’ हैं । राज्य में इस समय करीब 7 प्रतिशत क्षेत्र पर पेड़ लगे हैं, जिनको बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए मानूसन सीजन के दौरान राज्य में 3 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में पेड़ों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 75 वर्ष से अधिक आयु के पेड़ों की पेंशन का प्रावधान किया है, इनकी देखभाल करने वालों को सरकार द्वारा 2500 रुपए प्रतिवर्ष देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही जो किसान अपने खेतों में पेड़ लगाएंगे, उन्हें 10 हजार रुपए 3 वर्ष तक दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिक्रमा मार्ग पर 134 गांव आते हैं, जिस पर हम पंचवटी अर्थात पांच प्रकार के पौधे लगाएंगे। इनका संरक्षण एवं देखभाल वनमित्रों को सौंपा गया है। सरकार ने पौधों की उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए हरियाणा वन प्रबन्धन सूचना प्रणाली ऐप बनाया है। इस पर विभिन्न प्रकार के पौधों के मिलने के स्थानों की जानकारी प्राप्त होगी। इसके साथ ही हमने राज्य में 60 हर्बल पार्क बनाए हैं तथा शीघ्र ही अलग-अलग स्थानों पर 4 और बनाए जाएंगे। उन्होनें बताया कि मोरनी क्षेत्र में करीब 5000 एकड़ भूमि पर औषधीय वन विकसित किया जा रहा है। गुरुग्राम व रेवाड़ी में फूलों की खेती की जा रही है तथा मुरथल में 116 एकड़ व यमुनानगर में 11 एकड़ भूमि पर फूलों की पैदावार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचकूला और करनाल की धरती से शुरू किए गए आॅक्सीवन की संकल्पना को अब पूरे प्रदेश में अपनाया जा रहा है। इसमें विद्यार्थी, नौजवान, स्वयंसेवी संस्थाएं तथा सामाजिक संस्थाएं बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं, इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में पेड़ व पौधे को सृजन का प्रतीक माना है तथा वे पूजनीय हंै। ये स्वभाव से ही विन्रम एवं फलदायी होते हैं, इसलिए उन्हें यदि कोई पत्थर भी मारता है तो वह सामने वाले पर फल गिराते हैं।
लाडो की बगिया एक नया विचार : कंवरपाल
वन एवं शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने भी तीज उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लाडो की बगिया एक नया विचार है, जोकि एक सराहनीय कार्य है। इस पर्व पर प्रदेश सरकार लाडो की बगिया को बेटियों और पर्यावरण प्रेमियों को समर्पित करती है। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारी एवं निजी भूमि पर आॅक्सीवन विकसित किए जा रहे हैं तथा सिंचाई की भूमि को भी आमजन के सहयोग से हरा-भरा करने का प्रयास है।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. अमित अग्रवाल उपस्थित रहे तथा रोहतक के सांसद अरविन्द शर्मा, झज्जर के उपायुक्त श्याम लाल पूनिया सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र की बेटियां एवं गणमान्य लोग वर्चुअल माध्यम से जुडेÞ।

SHARE
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments