Kab Hai Sawan Shivratri: 11 या 12 कब है सावन की शिवरात्रि? एक क्लिक में दूर करें पूरा कंफ्यूजन

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Kab Hai Sawan Shivratri | Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना चल रहा है और अब लोगों को सावन की शिवरात्रि का काफी इंतजार है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कब है सावन की शिवरात्रि, पूजा का तरीका और सब कुछ.

Kab Hai Sawan Shivratri | Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है. इस पूरे महीने शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ रहती है और हर दिन भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जाता है. खासतौर पर सावन शिवरात्रि का दिन धार्मिक रूप से बहुत जरूरी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है.

कब मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि? (Kab Hai Sawan Shivratri)

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और 12 अगस्त की रात 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी.

इस अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी. शिव भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और देर रात तक भोलेनाथ की आराधना करते हैं.

सावन शिवरात्रि पर कैसे करें शिव पूजा?

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत और पूजा का संकल्प लें.

सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल चढ़ाएं. इसके बाद दूध, दही और शहद से अभिषेक किया जा सकता है. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें. पूजा के दौरान शिव मंत्रों का जाप करें और अंत में भगवान शिव की आरती करें.

मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से भक्तों को भोलेनाथ का आशीर्वाद मिलता है.

चार प्रहर में पूजा का क्या है महत्व?

सावन शिवरात्रि पर रात के समय चार प्रहर की पूजा करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, रात के चारों प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक और पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बड़े-बड़े अनुष्ठान की ही जरूरत नहीं मानी जाती. श्रद्धा से अर्पित किया गया एक लोटा जल भी भगवान शिव को प्रिय माना जाता है. यही वजह है कि सावन शिवरात्रि पर देशभर में भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाकर सुख-शांति और मनोकामना की प्रार्थना करते हैं.