भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है राधा अष्टमी
Radha Ashtami, (आज समाज), नई दिल्ली: हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा अष्टमी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का विधान है और विशेष चीजों का दान किया जाता है। इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरूआत 30 अगस्त को देर रात 10 बजकर 46 मिनट पर होगी।

वहीं भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का समापन 31 अगस्त को देर रात 12 बजकर 57 मिनट पर होगा। उदया तिथि के चलते इस बार राधा अष्टमी 31 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा-अर्चना करने का शुभ समय सुबह 11 बजकर 05 मिनट 01 बजकर 38 मिनट तक है।

राधा अष्टमी पूजा विधि

  • अगर आप वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन चाहते हैं, तो राधा अष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • मंदिर की सफाई करने के बाद पूजा की शुरूआत करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
  • श्री राधा रानी और कृष्ण जी को फूल, बांसुरी और भोग अर्पित करें। वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से साधक पर लाड़ली जी की कृपा बरसती है और वैवाहिक जीवन खुशियों से भर जाता है।

इन चीजों का करें दान

राधा अष्टमी के दिन पूजा करने के बाद मंदिर या गरीब लोगों में अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से साधक को जीवन में कभी भी किसी की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और हमेशा धन से तिजोरी भरी रहती है।

ऐसे करें राधा रानी को प्रसन्न

राधा अष्टमी की पूजा में सच्चे मन से राधा रानी के 108 नामों का मंत्र जप करें। सुख-समृद्धि में वृद्धि के लिए कामना करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को लाड़ली जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

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