विपक्ष बोला- ट्रम्प को खुश करने के लिए इससे जुड़े शहबाज, यह अमीरों का एक क्लब
Pakistan PM, (आज समाज), नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को दावोस में अमेरिका के बोर्ड आॅफ पीस के चार्टर पर साइन किए हैं। इस बोर्ड को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुवाई में गाजा में शांति कायम करने और फिर से बसाने के लिए बनाया गया है। पाकिस्तानी मीडिया डॉन के मुताबिक ऐसा करके शहबाज शरीफ अपने ही घर में घिर गए हैं। पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों ने उनके फैसले का विरोध किया है और इसे पाकिस्तान के लिहाज से गलत बताया है।
प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक जाहिद हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया है। हुसैन ने कहा कि पीएम को दूसरों के फैसलों का इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने इसे ट्रम्प की जोखिम भरी नीति का हिस्सा बताया और कहा कि यह बोर्ड यूनाइटेड नेशन के जैसा एक संगठन बन रहा है, जो वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा है। हुसैन ने कहा कि यह बस एक अमीरों का क्लब बन रहा है।
विनाशकारी कदम
लेखक हुसैन ने चिंता जताई कि पाकिस्तान ट्रम्प की गुड बुक्स में रहने के लिए उनकी नीतियों का पालन कर रहा है। एक जिम्मेदार देश की विदेश नीति ऐसी नहीं होती। बोर्ड में इजराइल और अब्राहम समझौते करने वाले देश शामिल हैं, लेकिन फिलिस्तीनियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने इसे विनाशकारी कदम करार दिया। उन्होंने पूछा कि क्या पाकिस्तान हमास को हथियार छोड़ने पर मजबूर करने के लिए तैयार है। उन्होंने आशंका जताई कि अमेरिकी जनरल के नेतृत्व में गाजा में फोर्स तैनात हो सकता है और पाकिस्तानी सैनिकों को फिलिस्तीनी प्रतिरोध से लड़ना पड़ सकता है।
बोर्ड फिलिस्तीनियों से उनका अधिकार छीन रहा
संसद में विपक्षी नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने एक्स पर पोस्ट कर इसे नैतिक रूप से गलत और अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड फिलिस्तीनियों से उनका अधिकार छीन रहा है। यह फिलिस्तीनियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को कमजोर करेगा और UN को हाशिए पर धकेलने की कोशिश है। पाकिस्तान, जो कश्मीर जैसे मुद्दों पर यूण्न के प्रस्तावों पर जोर देता है, इस तरह की पहल में शामिल होकर अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।
तहरीक-ए-इंसाफकी मांग पीस बोर्ड से सदस्यता वापस ले
जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेताओं का कहना है कि इतना जरूरी अंतरराष्ट्रीय फैसला लेने से पहले सभी पार्टियों से सलाह लेनी चाहिए थी। पीटीआई का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों को यूएन की मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए न कि उसके जैसी कोई नई संरचना बनानी चाहिए। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि वह बोर्ड आॅफ पीस में पाकिस्तान की सदस्यता फिलहाल वापस ले और इस मुद्दे पर संसद की निगरानी में फिर से चर्चा की जाए, जिसमें इमरान खान को भी शामिल किया जाए।
ये भी पढ़ें: तमिलनाडु के लोग डीएमके के कुशासन से मुक्ति चाहते हैं: पीएम मोदी


