
कल मनाया जाएगा बसंत पंचमी का पर्व
Basant Panchami, (आज समाज), नई दिल्ली: देशभर में बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता। यह तिथि मां सरस्वती के प्राकट्य से जुड़ी मानी जाती है, जिन्हें विद्या, बुद्धि, वाणी और विवेक की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की आराधना से ज्ञान का विकास होता है, विचारों में स्पष्टता आती है और मन एकाग्र होता है।
स्मरण शक्ति होगी प्रबल
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि इस वर्ष 23 जनवरी 2026 को सुबह 02:28 बजे से प्रारंभ होकर 24 जनवरी को रात्रि 01:46 बजे तक रहेगी। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि इस दिन किया गया पूजा, मंत्र जाप और अध्ययन स्मरण शक्ति को प्रबल करने में सहायक होता है। इसलिए बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को ही श्रद्धा पूर्वक मनाया जाएगा।
मां सरस्वती और बसंत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व
सनातन परंपरा में मां सरस्वती को ज्ञान का शुद्ध स्वरूप माना गया है। वे अज्ञान के अंधकार को दूर कर विवेक और चेतना का प्रकाश प्रदान करती हैं। बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह प्रकृति, मन और बुद्धि के जागरण का प्रतीक भी है। इसी दिन से बसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है, जो नवीन ऊर्जा, सृजन और सकारात्मकता का संकेत देती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर सरस्वती की आराधना करने से व्यक्ति की सोच स्पष्ट होती है और सीखने की क्षमता बढ़ती है।
विद्यार्थी बसंत पंचमी पर क्या करें
- प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को पवित्र करें।
- मां सरस्वती के चित्र या मूर्ति के सामने दीप जलाएं।
अपनी पुस्तकें, कॉपी और लेखन सामग्री पूजा के पास रखें। - पढ़ाई की शुरूआत इसी दिन से करना शुभ माना जाता है, विशेषकर छोटे बच्चों के लिए अक्षर अभ्यास।
- मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन विद्या से जुड़ा कोई भी शुभ आरंभ करने से उसका सकारात्मक प्रभाव लंबे समय तक रहता है।
बुद्धि तेज करने के लिए विशेष पूजा और मंत्र
- बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा विधि सरल लेकिन प्रभावशाली मानी गई है। पीले पुष्प, अक्षत, हल्दी और मीठे भोग अर्पित करना शुभ होता है। पूजा के समय मन को शांत रखकर सरस्वती मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ बताया गया है।
- या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
- इस मंत्र का 108 बार जाप करने से बुद्धि प्रखर होती है, वाणी में स्पष्टता आती है और पढ़ाई में रुचि बढ़ती है। विद्यार्थियों के साथ साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी यह मंत्र अत्यंत लाभकारी माना गया है।
आहार, आचरण और अनुशासन का महत्व
बसंत पंचमी के दिन धार्मिक आस्था के साथ साथ व्यवहारिक अनुशासन का पालन करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है, जिसमें फल, दूध, हल्का और शुद्ध आहार शामिल किया जाता है। अधिक तला भुना, मसालेदार और भारी भोजन से बचने से मन हल्का और एकाग्र रहता है।
पीले रंग का महत्व
पीले रंग के वस्त्र धारण करना सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। साथ ही क्रोध, आलस्य और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखना आवश्यक बताया गया है। गुरुजनों का आदर, माता पिता का आशीर्वाद और नियमित अध्ययन की आदत मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावशाली मार्ग मानी जाती है।

