मां स्कंदमाता की कृपा से संतान सुख, ज्ञान और आध्यात्मिक समृद्धि की होती है प्राप्ति
Maa Skandamata Bhog, (आज समाज), नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हुई है। ये 27 मार्च तक चलेगी। चैत्र नवरात्रि में सच्चे मन से पूजा करने और व्रत रखने से पापों का नाश होता है। मां दुर्गा की कृपा से जीवन में सुख, खुशहाली, धन, वैभव आता है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित किया गया है। आज नवरात्रि का पांचवां दिन है। ये दिन माता के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता को समर्पित किया गया है।
नवरात्रि के पांचवें दिन पूरे-विधि-विधान से मां स्कंदमाता की पूजा-अराधना की जाती है। मान्यता है कि मां स्कंदमाता का पूजन करने से उनकी कृपा से संतान सुख, ज्ञान और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त होती है, लेकिन माता की पूजा बिना भोग लगाए अधूरी मानी जाती है, इसलिए माता को आज पूजा के समय उनका प्रिय भोग अवश्य लगाएं। ऐसा करने से मां स्कंदमाता की कृपा प्राप्त होगी।
कैसा है स्कंदमाता का स्वरूप?
मां स्कंदमाता सिंह की सवारी करती हैं। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद देव बैठे हैं। जिसके कारण उनको स्कंदमाता पुकारा जाता है। साथ ही मां की कुल चार भुजाएं हैं। देवी का एक हाथ वरमुद्रा में है। जबकि दो में कमल के फूल हैं और एक से उन्होंने भगवान कार्तिकेय को पकड़ रखा है।
मां स्कंदमाता का प्रिय भोग
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है, इसलिए पूजा के समय उनको केले का भोग लगाना बहुत शुभ होता है। केले के अलावा माता रानी को केसर वाली खीर या पीले रंग की मिठाइयों का भी भोग भी लगाया जा सकता है।
स्कंदमाता की पूजा की विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करके मंदिर की साफ-सफाई करें। फिर पीले रंग के वस्त्र धारण करके मंदिर और घर में गंगाजल का छिड़काव करें। पूजा के समय माता रानी को पीला चंदन, पीले अक्षत, पीले वस्त्र, पंचामृत, मिठाई, पीले रंग के फूल और फल चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करें। व्रत की कथा पढ़ें। अंत में आरती से पूजा समाप्त करें।
मां स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंद माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता।
सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी।
तेरी जोत जलाता रहू मैं। हरदम तुझे ध्याता रहू मै।
कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा।
कही पहाडो पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे।
भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।
इंद्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे।
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खंडा हाथ उठाए।
दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी।
स्कंदमाता के सिद्ध मंत्र
- या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
मां स्कंदमाता का प्रार्थना मंत्र
- सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।
- मां स्कंदमाता का जप मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नम:।


