PM Narendera Modi: मनरेगा की जगह लेगा नया कानून, गांवों में रोजगार के साथ संपत्ति बनेगी: पीएम मोदी

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PM Narendera Modi: मनरेगा की जगह लेगा नया कानून, गांवों में रोजगार के साथ संपत्ति बनेगी: पीएम मोदी
PM Narendera Modi: मनरेगा की जगह लेगा नया कानून, गांवों में रोजगार के साथ संपत्ति बनेगी: पीएम मोदी

विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन एक्ट के समर्थन में आए पीएम नरेंद्र मोदी
PM Narendera Modi, (आज समाज), नई दिल्ली: विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल चुकी है। आज पीएम नरेंद्र मो दी ने भी विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट का समर्थन किया है। पीएम ने कहा कि यह कानून सिर्फ ग्रामीणों को मजदूरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांवों में काम के साथ-साथ स्थायी संपत्तियां बनेंगी, खेती को मजबूती मिलेगी और लंबे समय में ग्रामीण इलाकों की उत्पादकता बढ़ेगी।

यह नया कानून मनरेगा की जगह लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक आर्टिकल शेयर किया।

कानून बनाने से पहले राज्य सरकारों से की थी बातचीत

पीएमओ के मुताबिक, इस कानून को बनाने से पहले केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से बात की। इसके अलावा विशेषज्ञों के साथ तकनीकी बैठकों और अलग-अलग हितधारकों के साथ चर्चा भी की गई, ताकि सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा सके।

मजदूरों को डराने और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही कांग्रेस

इससे पहले मंगलवार को नागौर में किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा था कि कांग्रेस चिंतित है और योजना की आलोचना कर रही है। वह दावा कर रही है कि इससे नौकरियां छिन जाएंगी। यह कहीं बेहतर योजना है जो गांवों को पूरी तरह बदल देगी। उन्होंने कहा कि हमने इसे कम नहीं किया बल्कि बढ़ाया है। वे मजदूरों को डराने और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस में बैठे लोगों को यह भी नहीं पता कि आलू जमीन के नीचे उगते हैं या ऊपर

योजना के तहत अब कुल वार्षिक व्यय अनुमानित रूप से 1.51 लाख करोड़ रुपए है। कांग्रेस में बैठे लोग न तो खेत समझते हैं न गांव। उन्होंने न खेत देखे हैं न गांव न मिट्टी। उन्हें यह भी नहीं पता कि आलू जमीन के नीचे उगते हैं या ऊपर।

नए कानून में 125 दिन काम देने की गांरटी

सरकार ने कहा कि नए कानून में हर ग्रामीण परिवार को अब साल में 125 दिन काम देने की गारंटी होगी, जो पहले 100 दिन थी। इससे गांवों में रहने वाले परिवारों को ज्यादा काम मिलेगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।

केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगी खर्च

कानून की धारा 22 के तहत इस योजना के खर्च को केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करेंगी। सामान्य राज्यों में खर्च का बंटवारा 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य के बीच होगा।

इन राज्यों में 90 प्रतिशत खर्च वहन करेंगी केंद्र सरकार

वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों- जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाएगी।

धारा 6 के अनुसार, राज्य सरकारें खेती के व्यस्त समय, जैसे बुवाई और कटाई के दौरान, साल में अधिकतम 60 दिनों तक इस योजना के तहत मिलने वाले काम को नियंत्रित कर सकेंगी।

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