DTC Bus Strike: डीटीसी बस ड्राइवर्स की हड़ताल से दिल्ली बेहाल ! आने-जाने वाले लोग परेशान, ऑटो वाले कर रहे मनमानी

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Delhi DTC Strike News: दिल्ली में डीटीसी कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी है। कई बस स्टॉप पर यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और ऑटो वालों ने किराया बढ़ा दिया है। बसों की कमी का असर दिल्ली मेट्रो पर भी पड़ा और कई स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या बढ़ गई।
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दिल्ली में पिछले 3 दिनों से डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट बस ड्राइवर्स हड़ताल पर हैं।

DTC Bus Strike Latest Update: दिल्ली में डीटीसी के कॉन्ट्रैक्ट बस ड्राइवर्स की हड़ताल का असर तीसरे दिन भी राजधानी सड़कों पर साफ नजर आ रहा है। कई इलाकों में बस स्टॉप पर यात्री घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन बसें नहीं मिल रही हैं। बस सेवा प्रभावित होने के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने दिल्ली मेट्रो, ऑटो, ई-रिक्शा और ऐप आधारित कैब का रुख किया। कई जगहों पर ऑटो वाले मनमानी कर रहे हैं और दोगुना किराया वसूल रहे हैं। कैब की डिमांड बढ़ने से लोगों को इस सुविधा के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर बिना बसों के दिल्ली के यात्री बेहाल हो चुके हैं।

तीसरे दिन भी बसें सड़कों से गायब

डीटीसी ड्राइवरों की हड़ताल 15 सितंबर से जारी है और 17 सितंबर को इसका तीसरा दिन था। विभिन्न डिपो में ड्राइवरों के काम पर नहीं आने के कारण बस परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। श्रीनिवासपुरी, रानी खेड़ा, राजघाट, नेहरू प्लेस, बुराड़ी, वजीरपुर, घुम्मनहेड़ा और सरिता विहार समेत कई डिपो में ड्राइवर हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते कई प्रमुख बस स्टॉप पर यात्रियों की भीड़ दिखाई दी। नई दिल्ली के केंद्रीय टर्मिनल, मंडी हाउस, आईटीओ, आरएमएल अस्पताल, शिवाजी स्टेडियम और अन्य इलाकों में यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ा। कुछ जगहों पर बसें बेहद कम संख्या में पहुंचीं और कई यात्रियों को बिना सवारी के ही लौटना पड़ा। इससे दिल्ली में नौकरी-पेशा लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

बसों की हड़ताल से मेट्रो पर बढ़ा दबाव

डीटीसी बसों के बंद रहने का सीधा असर दिल्ली मेट्रो पर भी पड़ा। बड़ी संख्या में बस यात्री मेट्रो की ओर चले गए, जिससे कई स्टेशनों पर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ देखने को मिली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने अतिरिक्त यात्रियों को संभालने के लिए सेवाओं में बढ़ोतरी की। बुधवार को 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप और आठ अतिरिक्त ट्रेनें चलाई गईं। यह व्यवस्था गुरुवार को भी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक जरूरत के अनुसार जारी रखी गई। बुधवार को दिल्ली मेट्रो से यात्रा करने वालों की संख्या 80.71 लाख तक पहुंच गई थी, जबकि मंगलवार को यह आंकड़ा करीब 76.86 लाख था। इससे पता चलता है कि डीटीसी बसों की कमी का कितना बड़ा दबाव मेट्रो नेटवर्क पर पड़ा।

ऑटो और कैब का सहारा, किराया ज्यादा

बसें नहीं मिलने के कारण कम दूरी के लिए यात्रियों ने ऑटो और ई-रिक्शा का सहारा लिया, जबकि लंबी दूरी के यात्रियों ने कैब और मेट्रो को विकल्प बनाया। हालांकि यात्रियों का कहना है कि मांग बढ़ने के कारण ऑटो और कैब के लिए उन्हें सामान्य से अधिक पैसे देने पड़े। ऐप आधारित कैब सेवाओं में भी उपलब्धता की समस्या सामने आई। यात्रियों ने अधिक किराये और लंबी प्रतीक्षा की शिकायत की। बस हड़ताल का असर उन लोगों पर भी पड़ा जिन्हें इलाज या जरूरी काम के लिए शहर में सफर करना था। दिल्ली आने वाले दूसरे राज्यों के मरीजों और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों के लिए मेट्रो का नेटवर्क परिचित नहीं होने के कारण ऑटो और कैब ही विकल्प रह गए, लेकिन इनके अधिक किराये ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी।

आखिर क्यों हड़ताल कर रहे हैं ड्राइवर?

हड़ताल कर रहे कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर वेतन बढ़ाने के साथ-साथ महंगाई भत्ता, मेडिकल सुविधाएं, ओवरटाइम भुगतान और अन्य सेवा संबंधी मांगें उठा रहे हैं। कुछ ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें फिलहाल 862 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है और वे इसमें बढ़ोतरी चाहते हैं। दिल्ली सरकार का कहना है कि ड्राइवरों की कई मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने हड़ताल खत्म कर ड्राइवरों से काम पर लौटने की अपील की है। सरकार के मुताबिक वेतन बढ़ोतरी का मुद्दा अभी श्रम विभाग से परामर्श के बाद आगे बढ़ाया जाना है। सरकार और प्रदर्शनकारी ड्राइवरों के बीच बातचीत के बावजूद तीसरे दिन तक गतिरोध खत्म नहीं हुआ था। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए।