National News : रोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था व बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है Online Gaming का बाजार : MP Kartikeya Sharma

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National News : रोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था व बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है Online Gaming का बाजार : MP Kartikeya Sharma
National News : रोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था व बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है Online Gaming का बाजार : MP Kartikeya Sharma
  • राज्यसभा में सांसद कार्तिकेय शर्मा ने ई-स्पोर्ट्स को आधिकारिक खेल का दर्जा देने की मांग की

National News | Online Gaming | आज समाज नेटवर्क | नई दिल्ली। राज्यसभा में जीरो ऑवर के दौरान सांसद कार्तिकेय शर्मा ने सरकार से ई-स्पोर्ट्स को आधिकारिक खेल का दर्जा देने और ऑनलाइन गेमिंग के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल मनोरंजन से जुड़ा नहीं है, बल्कि युवा रोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

इलेक्ट्रॉनिक गेमिंग को ‘संभावनाओं और जोखिमों से भरा डिजिटल फ्रंटियर’ बताते हुए शर्मा ने कहा कि भारत की ऑरेंज इकोनॉमी अब कोई हाशिये का क्षेत्र नहीं रही है। भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी का वर्तमान आकार लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर है और यह देश की करीब 8 प्रतिशत कार्यशील आबादी को रोजगार प्रदान कर रही है। यह क्षेत्र सरकार के 1 ट्रिलियन डॉलर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य का एक अहम आधार बन चुका है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा गेमिंग ऑडियंस : शर्मा

उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा गेमिंग ऑडियंस है, जहां 50 करोड़ से अधिक अमेच्योर गेमर्स और लाखों प्रोफेशनल खिलाड़ी मौजूद हैं। भारत का गेमिंग बाजार, जिसकी मौजूदा वैल्यू 3.7 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो 2030 तक 10 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

इसके साथ ही एवीजीसी सेक्टर में 2030 तक लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा कि इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र को संरचित दिशा देने के लिए ई-स्पोर्ट्स को आधिकारिक खेल का दर्जा दिया जाना आवश्यक है। इससे प्रोफेशनल लीग्स, मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताएं और संगठित प्रशिक्षण तंत्र विकसित होंगे तथा युवाओं के लिए वैध और सम्मानजनक करियर विकल्प तैयार होंगे।

सांसद ने ऑनलाइन गेमिंग से उत्पन्न हो रही चुनौतियों पर भी चिंता जताई

हालांकि, उन्होंने अनियंत्रित शौकिया आॅनलाइन गेमिंग से उत्पन्न हो रही गंभीर चुनौतियों पर भी कड़ा रुख अपनाया। शर्मा ने कहा कि क्लिनिकल अध्ययनों के अनुसार अत्यधिक और बिना नियमन की गेमिंग का बच्चों और किशोरों में गेमिंग एडिक्शन, एडीएचडी, चिंता और अवसाद से सीधा संबंध पाया गया है।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में गेमिंग लत के कारण आत्म-हानि जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। एक अभिभावक के रूप में बोलते हुए शर्मा ने कहा कि तकनीकी प्रगति बच्चों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं हो सकती। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा केवल एक नीतिगत आवश्यकता नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है।

ई-स्पोर्ट्स को कवर करने के लिए नियामक ढांचा तैयार किया जाए

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पूरे गेमिंग इकोसिस्टम—गेम डेवलपमेंट, पब्लिशिंग और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स—को कवर करने वाला एक समग्र नियामक ढांचा तैयार किया जाए। साथ ही उन्होंने अनिवार्य गेम ऑडिट्स लागू करने की भी सिफारिश की, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।

शर्मा ने हालिया केंद्रीय बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे युवा शक्ति को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक ‘सही पहला कदम’ बताया।

अपने संबोधन के अंत में शर्मा ने कहा कि भारत के सामने चुनौती तकनीक को अपनाने या न अपनाने की नहीं है, बल्कि उसे अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने की है। सही नीति और नियमन के साथ भारत डिजिटल युग में सुरक्षित भी रह सकता है और वैश्विक नेतृत्व भी कर सकता है।

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