भगवान विष्णु की बरसेगी असीम कृपा
Jaya Ekadashi Vrat Katha, (आज समाज), नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। माघ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। खास बात यह है कि जया एकादशी की कथा सुनने और पढ़ने से भी भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।
जया एकादशी की पौराणिक व्रत कथा
पद्म पुराण के अनुसार, एक बार इंद्र की सभा में गंधर्व उत्सव मना रहे थे। वहां माल्यवान नाम का एक गंधर्व और पुष्पवती नाम की गंधर्व कन्या का नृत्य और गायन चल रहा था। गाते समय पुष्पवती और माल्यदान एक-दूसरे पर मोहित हो गए, जिससे उनका सुर-ताल बिगड़ गया। इस अनुशासनहीनता से क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने उन्हें श्राप दे दिया कि वे स्वर्ग से च्युत होकर मृत्युलोक में पिशाच (प्रेत) योनी में वास करेंगे।
श्राप के प्रभाव से दोनों हिमालय की तराई में पिशाच बनकर रहने लगे। वहां उन्हें न भोजन मिलता था, न ही नींद। कड़ाके की ठंड और भूख से वे व्याकुल रहते थे। वे अपने किए पर बहुत पछता रहे थे। माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन दोनों बहुत दुखी थे। अत्यंत ठंड और भूख के कारण उन्होंने उस दिन कुछ भी नहीं खाया और केवल फल खाकर पूरा दिन व्यतीत किया।
ठंड की वजह से वे रातभर सो भी नहीं पाए और अनजाने में उनसे जया एकादशी का जागरण हो गया। बिना जाने ही सही, लेकिन उन्होंने पूरी निष्ठा से एकादशी का व्रत पूर्ण कर लिया था। भगवान विष्णु उनके तप और अनजाने में किए गए व्रत से प्रसन्न हुए। अगले दिन सुबह होते ही दोनों का पिशाच शरीर छूट गया और वे पुन: अपने सुंदर गंधर्व रूप में वापस आ गए। आकाश से पुष्प वर्षा हुई और वे स्वर्ग लोक लौट गए।
जया एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत रखने से भूत-प्रेत योनि से भी मुक्ति मिलती है। यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी मानी जाती है, जो जीवन में किसी प्रकार के भय, कष्ट या नकारात्मक ऊर्जा से परेशान रहते हैं। इस दिन व्रत, पूजा और कथा पाठ करने से मन शांत होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


