CJI Surya Kant: फैमिली कोर्ट में वकील-जज काले चोंगे न पहनें: सीजेआई

0
151
CJI Surya Kant: फैमिली कोर्ट में वकील-जज काले चोंगे न पहनें: सीजेआई
CJI Surya Kant: फैमिली कोर्ट में वकील-जज काले चोंगे न पहनें: सीजेआई

कहा- जज, वकील और पुलिस को यूनिफॉर्म में नहीं आना चाहिए, इससे बच्चे डरते हैं
CJI Surya Kant, (आज समाज) नई दिल्ली: फैमिली कोर्ट बच्चों के मन से मनोवैज्ञानिक डर को खत्म करें। इसके लिए कोर्ट के पारंपरिक कामकाज में कुछ बदलाव किए जाएं। यह कहना है सीजेआई सूर्यकांत का। उन्होंने पूछा कि क्या फैमिली कोर्ट में काले चोंगे होने चाहिए? सीजेआई ने कहा, जब हम फैमिली कोर्ट के लिए एक नई सोच और अवधारणा बना रहे हैं तो क्या इससे बच्चे के मन में कोई मनोवैज्ञानिक डर पैदा नहीं होगा? उन्होंने सुझाव दिया कि फैमिली कोर्ट में पीठासीन जज और वकील यूनिफॉर्म में नहीं आने चाहिए।

सीजेआई सूर्यकांत ने ये बातें दिल्ली के रोहिणी में एक फैमिली कोर्ट की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में कहीं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने भी इस कार्यक्रम में अपने विचार रखे।

बच्चों के मन में डर पैदा करता है यह माहौल

उन्होंने कहा कि फैमिली कोर्ट में आप सभी के लिए हमारे पीठासीन अधिकारी कोर्ट की पोशाक में नहीं बैठेंगे। बार के सदस्य भी काले और सफेद चोंगे में नहीं आएंगे। पुलिस अधिकारी भी वर्दी में नहीं आएंगे, क्योंकि यह पूरा माहौल बच्चों के मन में डर पैदा करता है, खासकर तब जब वे किसी भी व्यवस्था के सबसे ज्यादा पीड़ित होते हैं।

फैमिली कोर्ट का मकसद मानवीय रिश्तों को सुधारना

सीजेआई ने कहा, हर कोई कोर्ट आना नहीं चाहता। जब हम सुधारों की बात करते हैं और जब हम फैमिली कोर्ट की अवधारणा को विवादों को सुलझाने के एक मंच के रूप में देखते हैं तो यह सिविल संपत्ति विवादों जैसा मामला नहीं है।
फैमिली कोर्ट का मकसद मानवीय रिश्तों को सुधारना, उन पर विचार करना और उन्हें ठीक करना है। क्या हम इन्हें पारिवारिक समाधान केंद्र नहीं कह सकते?

फैमिली कोर्ट के सामने आने वाले विवादों के भारी भावनात्मक, सामाजिक और वित्तीय परिणाम होते हैं

उन्होंने कहा, फैमिली कोर्ट में अन्य कोर्ट के मुकाबले ज्यादातर मुकदमों और विवादों के विपरीत दूर के पक्षों या बेजान संस्थाओं के बीच के नहीं होते। ये मामले परिवारों के भीतर से ही आते हैं। फैमिली कोर्ट के सामने आने वाले विवादों के भारी भावनात्मक, सामाजिक और वित्तीय परिणाम होते हैं जो तात्कालिक कानूनी विवाद से कहीं आगे तक जाते हैं।

ये भी पढ़ें: तृणमूल कांग्रेस ने 291 सीटों पर उतारे उम्मीदवार, 74 विधायकों के टिकट काटे, 15 की सीटें बदली