Supreme Court: कुत्तों से जुड़े कानून और नियम पहले से मौजूद, अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए: सिंघवी

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Supreme Court: कुत्तों से जुड़े कानून और नियम पहले से मौजूद, अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए: सिंघवी
Supreme Court: कुत्तों से जुड़े कानून और नियम पहले से मौजूद, अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए: सिंघवी

आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को तीसरे दिन सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
Supreme Court, (आज समाज), नई दिल्ली: कुत्तों से जुड़े कानून और नियम पहले से मौजूद हंै। ऐसे में अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यह दलील आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दी। सुप्रीम कोर्ट में आज तीसरे दिन इस मामले पर सुनवाई हो रही थी। ACGS (All Creatures Great and Small) नाम की संस्था की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट के समक्ष दलीले पेश की। सिंघवी ने अदालत से इस मामले में दखल न देने की अपील की। जब संसद जानबूझकर दखल नहीं दे रही है तो वहां अदालत को भी नहीं जाना चाहिए।

सिंघवी ने आगे कहा कि एमीकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) अच्छे तो होते हैं लेकिन वे कानून के सलाहकार होते हैं। किसी सब्जेक्ट के एक्सपर्ट नहीं। ऐसे मामलों में डोमेन एक्सपर्ट्स (जैसे पशु, पर्यावरण या स्वास्थ्य विशेषज्ञ) को भी शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 13 जनवरी रखी है।

अरावली केस का दिया उदाहरण

उन्होंने अरावली केस का उदाहरण दिया, जहां पहले बनी समिति में ज्यादातर अफसर थे एक्सपर्ट नहीं। इसी वजह से उस फैसले पर दोबारा विचार करना पड़ा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों को लेकर फैसला सुनाया था। उसके अनुसार 100 मीटर से ऊपर की ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली हिल्स माना जाना था। 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि पहले एक्सपर्ट राय जरूरी है।

कुत्ते रखने वाली महिलाओं के लिए अपमानजनक बातें करते हैं लोग

सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी (एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट) ने कहा, लोग कुत्ते रखने वाली महिलाओं के लिए अपमानजनक बातें करते हैं। कह रहे हैं कि महिलाएं संतुष्टि के लिए कुत्तों के साथ सोती हैं। एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कुत्तों के माइक्रो-चिप लगवाने की सलाह भी ठीक है। इसकी कीमत 100-200 रुपए है। एक बार जब यह लग जाएगी तो अगर कोई आक्रामक कुत्ता लोगों के पीछे भागता है। तो उसे ट्रैक कर आॅरेंज कैटेगरी में डाला जा सकता है। अगर काटने की घटना होती है तो रेड फ्लैग लगाया जा सकता है। दूसरे देशों में यह कारगर है। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा- उन देशों की आबादी कितनी है? जरा प्रैक्टिकल बातें करें।

अस्पतालों में कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें

एक वकील ने कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। एआईआईएमएस में गोल्डी नाम की एक फीमेल डॉग कई सालों से हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों में कीड़े होते हैं। अगर ऐसे कुत्ते अस्पताल में होंगे तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है। अस्पतालों में कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें।

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