कुल पांच तिथियों पर विशेष नक्षत्रों की उपस्थिति में निर्मित होता है ज्वालामुखी योग
Jwalamukhi Yog, (आज समाज), नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र में कई शुभ और अशुभ योगों के बारे में बताया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रह, नक्षत्रों और तिथियों के आधार पर समय समय पर शुभ-अशुभ योग बनते रहते हैं। कई विशेष योग शुभ फलदायी माने जाते हैं, जबकि कुछ अशुभ फल देने वाले होते हैं। इन्हीं अशुभ योगों में शामिल है ज्वालामुखी योग। इस योग में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है।
साल 2026 का पहला ज्वालामुखी योग इसी फरवरी माह में बनने जा रहा है। इतना ही नहीं इस माह में लगातार दो दिन ज्वालामुखी योग बनने वाला है। जो सुबह से लेकर दोपहर तक रहेगा। ज्वालामुखी योग कुल पांच तिथियों पर विशेष नक्षत्रों की उपस्थिति में निर्मित होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि फरवरी में ज्वालामुखी योग कब-कब बन रहा है? साथ ही जानते हैं कि इस दौरान कौन से काम नहीं करने चाहिए?
पहला ज्वालामुखी योग कब बनेगा?
ज्वालामुखी योग प्रतिपदा तिथि पर मूल नक्षत्र, पंचमी तिथि पर भरणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि पर कृतिका नक्षत्र, नवमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र या फिर दशमी तिथि पर अश्लेषा नक्षत्र पर बनता है। पंचांग के अनुसार, 24 फरवरी मंगलवार के दिन अष्टमी तिथि सुबह 07 बजकर 01 मिनट पर प्रारंभ हो रही है।
वहीं कृत्तिका नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 03 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। ऐसे में ज्वालामुखी योग 24 फरवरी को बनेगा। इस दिन ज्वालामुखी योग सुबह 07 बजकर 01 मिनट से दोपहर 03 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।
दूसरा ज्वालामुखी योग कब बेनगा?
दूसरा ज्वालामुखी योग 25 फरवरी को सुबह में 04 बजकर 51 मिनट से बन रहा है और दोपहर में 01 बजकर 38 मिनट तक ये ज्वालामुखी योग रहेगा। ये ज्वालामुखी योग नवमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से बनेगा।
इस दौरान क्या न करें?
ज्वालामुखी योग के समय में गृह प्रवेश, विवाह, सगाई, उपनयन संस्कार आदि नहीं करने चाहिए। यह अशुभ फलदायी होता है। ज्वालामुखी योग में नए काम और कारोबार की शुरूआत नहीं करनी चाहिए। ज्वालामुखी योग के समय मकान, दुकान, वाहन या अन्य संपत्ति की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। नए मकान के निर्माण का शुभारंभ नहीं करना चाहिए।
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