Business News : विदेशी कर्ज मामले में भारत की स्थिति अन्य देशों से मजबूत

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Business News : विदेशी कर्ज मामले में भारत की स्थिति अन्य देशों से मजबूत
Business News : विदेशी कर्ज मामले में भारत की स्थिति अन्य देशों से मजबूत

देश पर बाहरी कर्ज एवं जीडीपी का रेश्यो सिर्फ 19.2%

Business News (आज समाज), बिजनेस डेस्क : संसद में बजट सत्र चल रहा है। कल यानि रविवार को वित्त मंत्री देश का आम बजट संसद में पेश करेंगी। वहीं बीते गुरुवार को वित्त मंत्री ने देश की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन में रखी। इस दौरान कई अहम आंकड़े भी सामने आए जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का उदाहरण दे रहे हैं। इन्हीं में से एक है देश पर विदेशी कर्ज का प्रतिशत। आंकड़ों से यह स्पष्ट हो गया कि एक तरफ जहां दुनिया के कई देश इस समय कर्ज संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत की स्थिति बहुत अच्छी है।

देश पर बाहरी कर्ज एवं जीडीपी का रेश्यो सिर्फ 19.2% है और कुल कर्ज का 5 फीसदी से भी कम है। निर्यात बढ़ाने के लिए विनिर्माण लागत को कम करना होगा। नवाचार, उत्पादकता के साथ देश की मुद्रा और जीडीपी को मजबूत किया जा सकता है।

केंद्र का राजकोषीय घाटा हुआ कम

केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा दिसंबर 2025 के अंत तक 8.55 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक बजट लक्ष्य का 54.5 प्रतिशत है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि के 56.7 प्रतिशत से कम है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई। सरकार ने 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत यानी 15.69 लाख करोड़ रुपये रखा है। दिसंबर 2025 तक सरकार को कितनी प्राप्तियां हुईं?

नियंत्रक व महालेखा परीक्षक के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक केंद्र सरकार को कुल 25.25 लाख करोड़ रुपये की प्राप्तियां हुईं, जो बजट अनुमान का 72.2 प्रतिशत है। इसी अवधि में केंद्र सरकार का कुल व्यय 33.8 लाख करोड़ रुपये रहा, जो बजट अनुमान का 66.7 प्रतिशत है। इसमें से 25.93 लाख करोड़ रुपये राजस्व मद में और 7.87 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के रूप में खर्च किए गए।

दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस हासिल करने वाला देश

इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस हासिल करने वाला देश बना हुआ है, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है। 2024-25 में भारत को कुल 135.4 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला। सबसे बड़ी बात यह रही कि अब भारत आने वाले पैसे में विकसित देशों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इस बात से पता चलता है कि विदेशों में भारतीय स्किल और प्रोफेशनल वर्कर्स की मांग और कमाई दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

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