पश्चिम एशिया तनाव के चलते लिया फैसला, व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करेंगे भारतीय युद्धपोत
West Asia Crisis (आज समाज), नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लगातार जारी है। एक तरफ जहां अमेरिका और इजरायल ईरान के कई शहरों को निशाना बना रहे हैं तो वहीं ईरान भी खाड़ी देशों के उन स्थानों को निशाना बना रहा है जहां अमेरिकी सेना के ठिकाने हैं। इस तरह की कार्रवाई से समूचे पश्चिम एशिया में तनाव है। इस तनाव का सबसे ज्यादा असर समुद्री मार्ग अवरुद्ध होने के चलते विश्व व्यापार पर पड़ा है। विशेषकर एशिया में र्इंधन और एलपीजी की किल्लत चरम पर पहुंच रही है।
भारत भी इससे अछूता नहीं है। हालांकि ईरान ने बड़ा फैसला करते हुए गैस से लदे भारत के दो जहाजों को हार्मुज से निकाल दिया है। जो जल्द भारत पहुंच जाएंगे। बताया जा रहा है कि इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन गैस है। यह गैस सुरक्षित भारत पहुंचाने के लिए भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी के पास अपने कई युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार ये युद्धपोत भारत आने वाले व्यापारिक जहाजों को जरूरत पड़ने पर सहायता देने के लिए तैयार रखे गए हैं।
21 मार्च तक भारत पहुंच जाएगी गैस की खेप
रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना के जहाजों को इस क्षेत्र में इसलिए तैनात किया गया है, ताकि भारतीय व्यापारिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसी बीच शनिवार को ईरानी अधिकारियों ने भारत की ओर जा रहे दो भारतीय झंडे वाले एलपीजी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी। इनमें से एक जहाज शिवालिक है, जो जहाज निगरानी वेबसाइट के अनुसार फिलहाल ओमान के पास देखा गया था। इसके 21 मार्च तक अपने गंतव्य पर पहुंचने की संभावना है।
मार्ग को लेकर मंत्रालय ने यह जानकारी दी
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी क्षेत्र की समुद्री स्थिति, भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार फारस की खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर 668 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तीन जहाजों पर 76 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
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