India-US Trade Deal : भारत पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करेगा : गोयल

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India-US Trade Deal : भारत पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करेगा : गोयल
India-US Trade Deal : भारत पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करेगा : गोयल

कहा, द्विपक्षीय व्यापार समझौते का खाका तैयार, मार्च के तीसरे सप्ताह में इसपर हस्ताक्षर होने की उम्मीद

India-US Trade Deal (आज समाज), बिजनेस डेस्क : भारत और अमेरिका जल्द ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। इस संबंधी जानकारी देते हुए भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देश इस समझौते के खाके को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। दोनों देशों में इस समझौते को लेकर पूरा उत्साह है और उम्मीद है कि मार्च के तीसरे सप्ताह में इस समझौते पर दोनों देश हस्ताक्षर कर देंगे।

इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए अब अमेरिका की ओर एक बड़ा रणनीतिक बदलाव कर रहा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (लगभग 41 लाख करोड़ रुपये) का सामान खरीदने का इरादा रखता है।

केवल कुछ देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता भारत

इस समझौते के केंद्र में ऊर्जा विविधता, हाई-टेक उपकरण और एविशन सेक्टर है। अमेरिका के अनुसार भारत ने रूसी तेल के आयात को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोकने की प्रतिबद्धता भी जताई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब गिने-चुने देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। पीयूष गोयल ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत कच्चे तेल और कोकिंग कोल के स्रोतों में विविधता लाना चाहता है। कोकिंग कोल, जो स्टील उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है, को लेकर मंत्री ने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि हम अभी कोकिंग कोल के लिए केवल 2 या 3 भौगोलिक क्षेत्रों (देशों) पर निर्भर हैं और इनकी कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। हमें अमेरिका से उच्च गुणवत्ता वाला कोकिंग कोल भारत लाने में खुशी होगी।

कच्चा तेल आयात में भारत ने किया बड़ा बदलाव

भू-राजनीतिक लिहाज से एक बड़ी खबर यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए 25% टैरिफ को हटा दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि नई दिल्ली ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और मास्को (रूस) से सीधे या परोक्ष रूप से तेल आयात रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। यह भारत की तेल कूटनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

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