भारत ने इस पोर्ट पर किया है 1100 करोड़ का निवेश
Chabahar Port Deal, (आज समाज), नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट के बीच चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट में भारत को अमेरिकी पाबंदियों से मिली एक्सटेंडेड डेडलाइन भी खत्म होने जा रही है। ऐसे समय में रिपोर्ट है कि भारत चाबहार बंदरगाह में अपना स्टेक एक ईरानी कंपनी को सौंपने की तैयारी में है। इस तरह की रिपोर्ट पहले से है, लेकिन अब इसकी अहमियत इसलिए बढ़ गई है कि अमेरिकी डेडलाइन आने वाले रविवार को खत्म होने वाली है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का इस पोर्ट में 1100 करोड़ रुपए का निवेश है। भारत सरकार इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान दोनों से अलग-अलग बातचीत कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक यह बातचीत बेहद संवेदनशील है और इसमें शामिल अधिकारियों ने पहचान उजागर करने से इनकार किया है।
भारत को नवंबर 2025 में छह महीने की छूट मिली थी, जिससे चाबहार पोर्ट पर बिना रुकावट काम होता रहा। यह छूट इस महीने खत्म हो रही है। भारत को नवंबर 2025 में छह महीने की छूट मिली थी, जिससे चाबहार पोर्ट पर बिना रुकावट काम होता रहा।
अमेरिका और ईरान के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत चाबहार प्रोजेक्ट से पूरी तरह बाहर निकलने की योजना नहीं बना रहा है। भविष्य में यहां कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना है, जिसमें रेल लिंक भी शामिल है, जिससे अफगानिस्तान और आगे तक पहुंच मजबूत होगी।
भारत इस अस्थायी ट्रांसफर को अमेरिका और ईरान के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहा है। एक तरफ अमेरिका का ईरान पर सख्त प्रतिबंध है, वहीं दूसरी तरफ चाबहार पोर्ट भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है। यह पोर्ट पाकिस्तान को बायपास करते हुए सीधे अफगानिस्तान तक पहुंच देता है।
भारत की क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा रहा है चाबहार पोर्ट
चाबहार पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट के पास है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला अहम समुद्री रास्ता है। इसकी लोकेशन इसे रणनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बनाती है। चाबहार पोर्ट लंबे समय से भारत की क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा रहा है। इसे पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट में चीन की मौजूदगी के जवाब के तौर पर भी देखा जाता है। ऐसे में हिस्सेदारी ट्रांसफर का कोई भी कदम क्षेत्रीय कूटनीति पर असर डाल सकता है।
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