17 फरवरी को मनाई जाएगी फाल्गुन अमावस्या
Falgun Amavasya, (आज समाज), नई दिल्ली: सनातन धर्म में अमवस्या की तिथि पितरों को समर्पित की गई है। अमावस्या पितरों का आभार जताने के लिए एक खास दिन होता है। इसमें भी फाल्गुन माह की अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कल यानी 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या मनाई जाने वाली है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या का दिन तंत्र साधना, पितृ दोष निवारण और शनि बाधा से छुटकारा पाने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है।
इसके अलावा अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान किया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि अमावस्या के दिन दान करने से कभी न समाप्त होने वाला पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन पितृ दोष से निवारण के लिए कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं। आइए जानते हैं फाल्गुन अमावस्या के दिन पितृ दोष से निवारण के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में।
फाल्गुन अमावस्या पर पितृ दोष के उपाय
- अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं। फिर पांच प्रकार की मिठाइयां अर्पित करें। फिर भगवान विष्णु का स्मरण करें और जनेऊ अर्पित करें। फिर घी का दीपक जलाकर पांच से सात बार परिक्रमा लगाएं।
- शास्त्रों के अनुसार, दक्षिण दिशा पितरों की मानी जाती है। इस दिन गोबर के उपलों को जलाकर उसकी धुनि पर केसर से बनी खीर की आहुति दें।
- पूर्वजों का ध्यान करते हुए अपनी गलतियों की क्षमा मांगें। साथ ही पवित्र नदी में स्नान करके पितरों का तर्पण करें। श्राद्ध कर्म करें। माना जाता है कि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
- इस दिन एक कच्चा सूत लेकर उसको अपनी लंबाई के बराबर नाप लें। इसके बाद उस सूत को पीपल के पेड़ से लपेट दें। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है, जिसके बाद नौकरी और कारोबार में उन्नति होनी शुरू हो जाती है।


