Himachal Assembly Budget Session : आरडीजी पर सत्तापक्ष और विपक्ष में तकरार

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Himachal Assembly Budget Session : आरडीजी पर सत्तापक्ष और विपक्ष में तकरार
Himachal Assembly Budget Session : आरडीजी पर सत्तापक्ष और विपक्ष में तकरार
  • विपक्ष के विरोध के बीच हिमाचल विधानसभा में आरडीजी पर चर्चा

Himachal Assembly Budget Session | लोकिन्दर बेक्टा । शिमला। 16वें वित्तायोग द्वारा हिमाचल प्रदेश सहित देश के 17 राज्यों का राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद करने के मुद्दे पर सोमवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के विरोध के बीच चर्चा आरंभ हुई। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने यह कहते हुए आरडीजी पर चर्चा का विरोध किया कि इस मुद्दे का राज्यपाल के अभिभाषण में विस्तृत जिक्र है।

इसके अलावा बजट भाषण में भी इस मुद्दे पर सदस्य अपने विचार रख सकते हैं, इसलिए अलग से प्रस्ताव लाकर इस मुद्दे पर चर्चा की आवश्यकता नहीं है। इससे पूर्व, संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने नियम 102 के तहत सदन में सरकारी संकल्प प्रस्तुत किया।

संकल्प में कहा गया है कि प्रदेश को संविधान के अनुच्छेद 275 और 280 के तहत राजस्व सहायता अनुदान (आरडीजी) की राशि 5वें से 15वें वित्तायोग तक प्राप्त हो रही थी जो कि 16वें वित्तायोग की सिफारिशों के अनुरूप केन्द्र सरकार द्वारा आगामी वित्तीय वर्ष से बंद की गई है, जिससे प्रदेश में आर्थिक संकट के हालात पैदा हुए हैं। इसके दृष्टिगत यह सदन केन्द्र सरकार से पुरजोर सिफारिश करता है कि पूर्व में दी जा रही राजस्व सहायता अनुदान राशि प्रदेश की आर्थिक स्थिति के मध्यनजर राजस्व घाटे के अनुरूप प्रदान की जाए।

इस सरकारी संकल्प पर चर्चा शुरू करते हुए संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान का मुद्दा कोई भाजपा या कांग्रेस का मुद्दा नहीं है, बल्कि प्रदेश की 75 लाख आबादी के हितों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी मुआवजा बंद होने के बाद हिमाचल का केंद्रीय करों में हिस्सा बहुत कम हो गया है।

उस पर अब आरडीजी भी अगले वित्त वर्ष से बंद होने जा रही है। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति पटरी से उतर गई है। उन्होंने कहा कि 15वें वित्तायोग से हिमाचल को सबसे अधिक और उदार वित्तीय सहायता मिली, लेकिन 16वें वित्तायोग ने इस सहायता पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025-26 में राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे अधिक राजस्व अर्जित किया है।

मुख्यमंत्री नहीं मानते सुझाव – जयराम

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरडीजी पर शुरू हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर राजनीतिक हमले बोले। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुझाव नहीं सुनते, सुनते हैं तो मानते नहीं और अभी भी छात्र राजनीति जैसा व्यवहार कर रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपने मित्रों को सरकार में दी गई नियुक्तियों पर तुरंत विचार करने की सलाह दी और कहा कि यदि सरकार ने तुरंत फिजूलखर्ची नहीं रोकी तो आने वाले समय में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन, जीपीएफ, विकास और अन्य योजना व गैर योजना कार्यों पर संकट आना तय है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ रोज-रोज बयान देने से आर्थिक संकट दूर नहीं होगा। इसके लिए सरकार को बड़े-बड़े फैसले लेने होंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार के इन फैसलों पर विचार करेगा और यदि फैसले सही हुए तो इनका समर्थन होगा, अन्यथा नहीं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार हर रोज आरडीजी बंद होने का रोना तो रो रही है, लेकिन फिजूलखर्ची बंद करने को तैयार नहीं है। इस बात का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि सुक्खू सरकार ने अपने सीपीएस को बचाने के लिए वकीलों पर ही 10 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर दिए।

चेयरमैन जिन्हें 30 हजार रुपए वेतन मिलता था, उन्हें 1.50 लाख रुपए वेतन दिया जा रहा है। यही नहीं, लगभग 90 वकीलों को अलग-अलग तरह का अधिवक्ता लगा दिया गया है। इस तरह की फिजूलखर्ची के बाद सरकार किस मुंह से आर्थिक संकट या आरडीजी बंद होने का रोना रो रही है।

जयराम ठाकुर ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यदि हम से कर्ज लेने की गलती हुई है तो कांग्रेस सरकार ये गलती न करे। उन्होंने कहा कि भाजपा के सत्ता से जाने के समय प्रदेश पर 69600 करोड़ रुपए का कर्ज था, जो बढ़कर अभी तक 1.10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

बहस में हिस्सा लेते हुए ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि आरडीजी को बंद करने का मुद्दा कोई पॉलिटिकल मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल को अभी 2023 और 2025 की मॉनसून जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान से उबरना है। इसके अलावा, हिमाचल की तुलना कर्नाटक जैसे राज्यों से नहीं की जा सकती क्योंकि उसके पास रिसोर्स बनाने के बहुत कम रास्ते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की अलग-अलग स्कीमों के तहत हिमाचल को फंड देना कोई अहसान नहीं, बल्कि फेडरल स्ट्रक्चर में हिमाचल का हक है।

भाजपा सदस्य रणधीर शर्मा ने सरकार की फिजूलखर्ची का मामला उठाया और कहा कि ऐसे में सरकार आरडीजी का रोना नहीं रो सकती। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आरडीजी के मुद्दे को उठाने का लक्ष्य केंद्र से मदद हासिल करना नहीं, बल्कि इस मुद्दे पर विशुद्ध राजनीति करना है। उन्होंने कहा कि सरकार कांग्रेस की है और यदि उनसे सरकार नहीं चलती तो छोड़ दें, भाजपा चला देगी।

बंद नहीं होगी ओपीएस – मुख्यमंत्री

आरडीजी पर विधानसभा में चल रही मैराथन चर्चा के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में घोर आर्थिक संकट के बावजूद कर्मचारियों के लिए शुरू की गई ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) बंद नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार राज्य बिजली बोर्ड का निजीकरण नहीं करेगी, बल्कि इसे और अधिक मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने विपक्ष से पूछा कि क्या वह आरडीजी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के पास जाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि 16वें वित्तायोग ने जो सिफारिशें की हैं, उसका भविष्य में क्या असर होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार इस लड़ाई को युद्ध की तरह लड़ेगी और जीतेगी भी। उन्होंने विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप भी लगाया।

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