नई दिल्ली. नवरात्री को लेकर तमाम भक्तों में गजब का उत्साह नजर आ रहा है. अभी इसके आने में कुछ दिन बाकी है. त्योहार से जुड़ी तमाम बातों को लेकर लोग जानकारी लेना चाहते हैं. नवरात्र इस बार 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होंगे. पूरे देश के अलग अलग हिस्सों में इसे लेकर तैयारी अपने आखिरी पडाव पर है. बड़े बड़े पंडाल बनाए जा चुके हैं. नवरात्र को लेकर मंदिरों और घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस बार मां भगवती हाथी पर सवार होकर आएंगी.
आपको बात दें कि इस बात 10 अक्टूबर शनिवार की रात 9:15 बजे अमावस्या खत्म होगी. इसके बाद रात 9:16 बजे से आश्विन शुक्ल प्रतिपदा शुरू हो जाएगी. अगले दिन 11 अक्टूबर की रात 9:28 बजे तक रहेगी. इसी वजह से इस बार नवरात्र का आरंभ 11 अक्टूबर को होगा.
कलश स्थापना कब कर सकते हैं
इस नवरात्री कलश स्थापना करने का शुभ मुहूर्त कब रहेगा यह हम आपको बताने जा रहे हैं. चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के उत्तरार्ध काल में स्थापना करना शुभ रहेगा. 11 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा. इसी अवधि में कलश स्थापना की जा सकती है. उन्होंने बताया कि चित्रा नक्षत्र 10 अक्टूबर की रात 9:38 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 10:28 बजे तक रहेगा. वहीं, वैधृति योग 10 अक्टूबर की रात 10 बजे से 11 अक्टूबर की रात 9 बजे तक रहेगा.
कन्या पूजन कितना ज्यादा महत्व
नवरात्री में माता दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है. देवी व्रत में कुमारी पूजन का विशेष महत्व है. सामर्थ्य के अनुसार नवरात्र में प्रतिदिन नौ कुमारियों के चरण धोकर उन्हें देवी स्वरूप मानकर पूजा करते हैं. मान्यता के अनुसार एक कन्या के पूजन से ऐश्वर्य, दो कन्याओं से भोग और मोक्ष, तीन से धर्म-अर्थ-काम, चार से राज पक्ष से सम्मान और पांच कन्याओं के पूजन से विद्या की प्राप्ति होती है. छह कन्याओं से सभी प्रकार के सुख, सात से प्रतिष्ठित पद, आठ से धन-संपदा और नौ कन्याओं के पूजन से राज्य एवं प्रभुत्व की प्राप्ति का विधान बताया गया है.
नवरात्र की प्रमुख तिथियां
11 अक्टूबर: पहला नवरात्र
12 अक्टूबर: दूसरा नवरात्र
13 अक्टूबर: तीसरा नवरात्र
14 अक्टूबर: चौथा नवरात्र
15 अक्टूबर: पांचवां नवरात्र
16 अक्टूबर: छठा नवरात्र
17 अक्टूबर: सातवां नवरात्र
18 अक्टूबर: आठवां नवरात्र
19 अक्टूबर: अष्टमी और नवमी
20 अक्टूबर: नवमी और दशमी


